गै़र-मुस्लिम विद्वानों की नज़र में

पैगम्बरे-इस्लाम महात्मा गॉधी के विचारों में

‘‘ इस्लाम अपने अति विशाल युग में भी अनुदार नही था, बल्कि सारा संसार उसकी प्रशंसा कर रहा था। उस समय, जबकि पश्चिमी दुनिया अन्धकारमय थी, पूर्व क्षितिज का एक उज्जवल सितारा चमका, जिससे विकल संसार को प्रकाश और शान्ति प्राप्त हुर्इ। इस्लाम झूठा मजहब नही हैं। हिन्दुओं को भी इसका उसी तरह अध्ययन करना चाहिए, जिस तरह मैने किया हैं। फिर वे भी मेरे ही समान इससे प्रेम करने लगेंगे।

नारी - उद्धारक: श्रीमति एनीबेसेन्ट अपने लेक्चर में कहती हैं-

‘‘आप जरा हमारे पैग़म्बर का ख्याल कीजिए और उस स्थिति की कल्पना कीजिए जब केवल उनकी पत्नी ही उन पर र्इमान लार्इ हैं। उसके बाद अत्यन्त निकटतम सम्बन्धी उन पर र्इमान लाते हैं। इस बात से भी मुहम्मद (सल्ल0) के विषय में कुछ-न-कुछ पता चलाता है। एक ऐसे समूह में से अनुयायी प्राप्त कर लेना सहज हैं, जो आपकों नहीं जनता, जो आपकी केवल प्लेटफार्म ही पर देखता हैं।

धरोहर-रक्षक: ग्रेट टीचर हरबर्ट वॉयल लिखते हैं-

‘‘ हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) को आसपास के रहने वाले लोग अमीन (धरोहर-रक्षक) कहकर पुकारते थे। ग़रीब लोग, जो कष्ट में पड़े होते आपके पास परामर्श करने आते थे, क्योकि उन्हे आपकी सच्चार्इ पर विश्वास था। हजरत मुहम्मद (सल्ल0) अधिकतर एक निर्जन स्थान में गुफा के भीतर र्इश-उपासना में लीन रहते। एक रात आसमान से एक प्रकाश प्रकट हुआ और एक तेजस्वी आकृति पर आपकी आपकी दृष्टि पड़ी जिसने कहा-

नितान्त गम्भीर व्यक्तित्व: प्रसिद्ध फ्रांसीसी विद्धान डाक्टर गेस्टोव लीबान अपनी पुस्तक ‘इस्लाम की स

‘‘ हजरत मुहम्मद (सल्ल0) नितान्त गम्भीर, अल्पभाषी और दृढ़ संकल्पी थें। आप जितने सचेष्ट थे उतने ही सहनशील और धैर्यवान भी थें। आप अत्यन्त शुद्ध विचारोंवालों थे। यह कहना कि मुहम्मद (सल्ल0) जादूगर थें, मेरे निकट एम मूर्खतापूर्ण बात हैं।’’

मानव-जीवन का सर्वोत्तम आदर्श: राजा राधा प्रसाद सिंह, (बी0ए0, एल0एल0बी0)

राजा राधा प्रसाद सिंह, (बी0ए0, एल0एल0बी0) हजरत मुहम्मद साहब के जन्म दिवस की एक सभा के भाषण में कहते हैं-

‘‘ विश्व-भूगोल और इतिहासके पृष्ठ, संसार के किसी भाग या कोने का, ऐसा उदाहरण नही पेश कर सकें जिसमें प्रकृति ने हर समाज, हर समूह, हर वंश और हर जाति के चरित्र और स्वभाव के सुधार और बनाव के लिए नबी, अवतार पथप्रदर्शक, हादी, पैगम्बर न भेजे हों।
‘‘ वलिकुल्लि कौमिन हाद’ पवित्र कुरआन की यह आयत इस बात की साक्षी हैं कि प्रकृति ने हर कोने और हर भाग पर चाहे पूरब में हो या दक्षिण में, कोर्इ-न-कोर्इ समाज-सुधारक,...

मिस्टर बी0एन0 साहनी एडीटर ‘हिन्दुस्तान टाइम्ज़’ दिल्ली

‘‘ अपने-अपने युग में मुहम्मद (सल्ल0) र्इसा और बुद्ध जैसे महात्माओं के साथ उसी प्रकार का घृणापूर्ण और तिरस्कारयुक्त व्यवहार किया गया, जो अघर्मियों (यानी झूठे घर्म के उपासकों) की ओर से सच्चे धर्म के प्रवर्तकों के लिए खास हैं और खास हैं और हजरत मुहम्मद (सल्ल0) को इसी प्रकार के घर का एक महान अग्रण्य नेता समझकर ही मैं इस बात पर मजबूर हुआ हूॅ कि उनका सम्मान करूॅ ।

यह आप ही काम था कि अद्वितीय साहस और दृढ़ता के साथ, जिसके कारण आप कर्इ बार मौंत के मुहॅ तक पहॅुच गए, आपने उस काल के प्रचलित धर्म-सिद्वान्तों को...

मेरी ऑखें खुल गर्इ: बाबू-मुकुट - धारी प्रसाद (बी0ए0एल0एल0बी0) गया के प्रमुख राष्ट्रीय नेता है।,

बाबू-मुकुट - धारी प्रसाद (बी0ए0एल0एल0बी0) गया के प्रमुख राष्ट्रीय नेता है।, जो स्वाधीनता आन्दोलन में अनेक बार जेल-यात्रा कर चुके हैं और 12 वर्ष तक नगर पािका के अध्यक्ष रह चुके हैं। हजरत मुहम्मद(सल्ल0) के जन्म दिवस की एक सभा के सभापति पद से भाषण करते हुए आपने फरमाया-
आप लोगों को यह मालूम हो याा न हों, लेकिन सत्य यह हैं कि इस्लाम और मुहम्मद साहब के सम्बन्ध में मेरे विचार पहले उतने अच्छे नही थे जैसा कि आप आज पाते हैं। मेरा दिल उनकी ओर से द्वेष से भंग हुआ था और मुझे मुहम्मद साहब और उनके इस्लाम मे कोर्इ गुण...

संसार के लिए दया-निधि: मिस्टर देवदास गॉधी , जो दिवंगत महात्मा गॉधी के कनिष्ठ पुत्र थें, अपने एक निब

एक महान शक्तिशाली सूर्य के समान र्इश्वर दूत हजरत मुहम्मद (सल्ल0) ने अरब की मरूभूमि को उस समय रौशन किया, जब मानव-संसार घोर अन्धकार मे डूबा हुआ था और जब आप इस दुनिया से विदा हुए तो आप अपने सब काम पूर्ण कर चुके थें। वे पवित्रतम काम जिससें दुनिया को स्थायी लाभ पहुॅचने वाला था।

सीधी-सच्ची राह दिखानेवाले: अविभाजित पंजाब के प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता और विद्धान डाक्टर सत्यपाल

जिस समय हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) पैदा हुए, सारे अरब में मूर्तिपूजा जोरो पर थी। हर और शिर्क (बहुदेव-पूजा) का दौरा-दौरा था। र्इश्वर का विश्वास लुप्त हो रहा था। अत्याचार, दमन और बलातु हिंसा के समय तो अवश्य र्इश्वर को पूज लिया जाता था, लेकिन उसकी नित्य और वास्तविक उपासना से लोग कोसो दूर थे। कुसंस्कारों और धार्मिक पाखण्डों का जोर था। लेकिन र्इश्वरीय आज्ञापालन का नाम न था। ऐसे समय में आपने इस ज्ञान से र्इश्वर के एकत्व की घोषणा की कि उसकी गूॅज से अरब में एक नर्इ दुनिया आबाद हो गर्इ।