By: सैयद अबुल आला मौदूदी (रह0)
भाइयों! यदि कोर्इ व्यक्ति आपसे कहे कि बाजार में एक दुकान ऐसी हैं, जिसका कोर्इ दुकानदार नही हैं, न कोर्इ उसमें माल लानेवाला हैं न बेचनेवाला और न कोर्इ उसकी...
By: इस्लाम एक स्वयं सिद्ध र्इश्वरीय जीवन व्यवस्था:राजेन्द्र नारायण लाल
मुसलमानों पर आरोप लगाया जाता हैं कि वे बड़े पृथकतावादी हैं। औष्ट्रिक, नीग्रो, मंगोल आदि जितनी जातियॉं भारत आर्इ, हिन्दूओं में घुल-मिलकर एक हो गर्इ...
अरबी भाषा में 'इलाह' का अर्थ है इबादत के योग्य, अर्थात् वह सत्ता जो अपनी महिमा, तेज और उच्चता की दृष्टि से इस योग्य हो कि उसकी पूजा की जाए और.....