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    • शहादाह:  इस का शाब्दिक अर्थ है गवाही देना। इस्लाम में इसका अर्थ इस अरबी घोषणा से हैःREAD MORE
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    • नमाज़:  प्रत्येक दिन पाँच बारा निर्धरित विधि से निर्धरित समय निर्धारित मात्रा में हर बालिग और होश मन्द को मर्द और औरत पर नमाज अद करना अनिवार्य है|हर नमाज कुछ निर्धारित अंश पुरुष के लिये सामूहिक...READ MORE
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    • रोज़ा:  ईस्लाम क चौथा स्तम्भ 'रोजा' है। इस्लमी कैलेन्डर के नवे मास रमाजान में हर बालिग, होशमंद, स्वस्थ, मुसलमान मर्द और औरत पर महीने भर लगातार रोजा रखना अनिवार्य किया गया हैREAD MORE
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    • हज:  हज उस धार्मिक तीर्थ यात्रा का नाम है जो इस्लामी कैलेण्डर के १२वें महीने में मक्का के शहर में जाकर की जाती है।READ MORE
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    • ज़कात:  र्इश्वर ने प्रत्येक मुसलमानों धनवान व्यक्ति के लिए अनिवार्य किया हैं कि यदि उसके पास कम से कम साढ़े बावन तोला चॉदी हो और उसे रखे हुए पूरा एक वर्ष बीत जाए, तो वह उसमें से चालीसवॉ भाग अपने...READ MORE

इस्लाम का अध्यन क्यों करें

इस्लाम का अध्यन...

आधुनिक सभ्यता को केवल इस्लाम धर्म ही भाएगा या स्वीकार्य होगा। मुझे और अधिक आधुनिक सभ्यता को और विशेश मेरी पीढ़ी को केवल इस्लाम धर्म ही स्वीकार्य होगा। READ MORE

विद्वानों की नजर में इस्लाम

प्रोफ़ेसर के॰ एस॰ रामाकृष्णा राव‘‘पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) की शिक्षाओं का ही यह व्यावहारिक गुण है, जिसने वैज्ञानिक प्रवृत्ति को जन्म दिया। इन्हीं शिक्षाओं ने नित्य के काम-काज और उन कामों को भी जो सांसारिक काम कहलाते हैं आदर और पवित्राता प्रदान की। क़ुरआन कहता है कि इन्सान को ख़ुदा की इबादत के लिए पैदा किया गया है, लेकिन ‘इबादत’ (पूजा) की उसकी अपनी अलग परिभाषा है। ख़ुदा की इबादत केवल पूजा-पाठ आदि तक सीमित नहीं, बल्कि हर वह कार्य जो अल्लाह के आदेशानुसार उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने तथा मानव-जाति की भलाई के लिए किया जाए इबादत के...

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इस्लाम जिससे मुझे दिली प्यार है

अब्दुल्लाह आडीयार

अब्दुल्लाह आडीयारचमत्कारों के बिना: चमत्कारों के बिना सबसे बड़ा चमत्कार दिखाने वाले नबी! धार्मिक गुरूओं पर आम लोग आसानी सें विश्वास नही करते। बहुत सारे गुरू आश्चर्यजनक और अस्वाभाविक चीजों का प्रदर्शन करते हैं और उनके चमत्कारों को देखकर आम इन्सानों की चमत्कार प्रिय अभिरूचि उन पर विश्वास करने लगती हैं।

र्इश्वर पर र्इमान भी बहुत से धर्मो मे इसी चमत्कार प्रियता पर निर्भर करता हैं- हकीकत यह हैं कि जब तक इंसान इस बात को न माने कि नेक मनुष्य को शाश्वत जीवन और बुरे मनुष्यों को शाश्वत असफलता मिलकर रहेगी तब तक...

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गलतफहमियों का निवारण

इस्लाम औरतों को पर्दे में रखकर उनका अपमान क्यों करता हैं?इस्लाम में औरतों की जो स्थिति हैं, उसपर सेक्यूलर मीडिया का ज़बरदस्त हमला होता हैं। वे पर्दे और इस्लामी लिबास को इस्लामी क़ानून में स्त्रियों की दास की मिसाल के रूप मंय पेश करते हैं। इससे पहले कि हम पर्दे के धार्मिक निर्देश के पीछे मौजूद कारणों पर विचार करें, इस्लाम से पूर्व समाज में स्त्रियों की स्थिति का अध्ययन करते हैं।

1- भूतकाल में स्त्रियों का अपमान किया जाता और उनका प्रयोग केवल काम-वासना के लिए किया जाता था..

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इस्लाम के बारे में

हज़रत मुहम्मद (सल्लo) की नुबूवत के प्रमाण  थोड़ी देर के लिए शारीरिक ऑखें बन्द करके कल्पना की ऑखें खोल लीजिए और एक हजा़र चार सौं वर्ष पीछे के संसार को देखिए, यह कैसा संसार था? मनुष्य और मनुष्य के बीच विचार-विनिमय के साधन कितनें कम थें। देशों और जातियों के बीच सम्बन्ध के साधन कितने सीमित थें, मनुष्य की जानकारी कितनी कम थी, उसके विचार कितने संकीर्ण थे, उस पर भ्रम और असभ्यता कितनी छार्इ थी, अज्ञान के अंधेरे में ज्ञान का प्रकाश कितना धुधला था और अंधेरे को ढकेल-ढकेलकर कितनी कठिनाइयों के साथ फैल रहा था।..

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होली क़ुरान

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फ़ोल्डर्स

मेरी इस्लाम यात्रा

जनाब अब्दुल्ला अडियार मरहूम तामिल भाषा के प्रसिद्व कवि, पत्रकार, उपन्यासकार और पटकथा लेखक थें। उनका जन्म 16 मई 1935 को त्रिरूप्पर (तमिलनाडु) में हुआ। प्रारम्भिक षिक्षा कोयम्बटूर में हुई। वे नास्तिक थें, लेकिन विभिन्न धर्मो की पुस्तकें पढ़ते रहते थें। किसी पत्रकार और साहित्यकार को विभिन्न धर्मो के बारे में जानकारी रखनी पढ़ती हैं। जनाब अब्दुलाह अडियार अध्ययन के दौरान...

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