क़ुरआन क्या है ?

कुरान सभी के लिए

कुरआन मजीद इतने उच्चकोटि की वाणी है कि उसे जो सुनता लहालोट हो जाता। हजरत मुहम्मद (सल्ल0) कुरआन पढ़कर लोगो को सुनाते, जो पढ़े-लिखे और समझदार थे वे इस पर र्इमान लाते कि यह र्इशग्रन्थ हैं। इस प्रकार कुरआन के माननेवालों की संख्या बढ़ने लगी और दुश्मनों की परेशानी बढ़ने लगी। जो इस पर र्इमान लाता उसको मारा-पीटा जाता, किसी के पैर मे रस्सी बॉधकर घसीटा जाता, किसी को जलती हुर्इ रेत पर लिटाकर उपर से भारी पत्थर रख दिया जाता, किसी को उलटा लटकाकर नीचे से धूनी दी जाती। फिर भी ये र्इमान लानेवाले पलटने को तैयार नही...

कुरआन मजीद अन्तिम र्इशग्रन्थ

मानव-निर्मित जीवन-सिद्धान्त :-हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दुनिया मे अन्तिम र्इशदूत के रूप में आने से पहले दुनिया का बड़ा बुरा हाल था। अब तक जितने र्इशग्रन्थ आ चुके थे वे सबके सब परिवर्तन का शिकार होकर बेकार हो चुके थे। सैकड़ो वर्ष से कोर्इ र्इशदूत भी नही आया। अत: पूरी दुनिया मे अराजकता ही अराजकता थी। मानव का हर स्तर पर शोषण हो रहा था। दुनिया के विचारक, समाज-सुधारक, दार्शनिक और सूफी-सन्त, ऋषि-मुनि मानव की इस दुर्दशा से बड़़े दुखी थे। वे मानव को इस संकट से निकालकर सुन्दर, सुगम और सुखदायी...

कुरआन पुकारता हैं

ऐ लोगो, बन्दगी इख्तियार करो अपने उस रब की जो तुम्हारा, और तुमसे पहले जो लोग हुए है उन सबका पैदा करनेवाला है, तुम्हारे बचने की आशा’ इसी प्रकार हो सकती है। (कुरआन, 2:21)

(1. अर्थात दुनिया मे गलत देखने और गलत काम करने से, और आखिरत (परलोक) में अल्लाह की यातना (अजाब) से बचने की आशा।)

ऐ लोगो, धरती मे जो हलाल (वैद्य) और अच्छी-सुथरी चीजे हैं उन्हे खाओं और शैतान के बताए हुए रास्तों पर न चलो। वह तुम्हारा खुला दुश्मन है।

ऐ लोगो, अपने रब से डरो, (या अपने रब की नाफरमानी से बचो) जिसने तुमको ‘एक...