चर्चा में

मुसलमान रूढ़िवादी और आतंकवादी

धर्म या विश्व राजनीति से संबंधित चर्चाओं में यह प्रश्न प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप् से मुसलमानों पर उछाला जाता हैं। मीडिया के किसी भी साधनों में मुसलमानों को बख़्शा नहीं जाता और इस्लाम तथा मुसलमानों के संबंध में बड़े पैमाने पर ग़लतफ़हमियॉ फैलार्इ जाती हैं, उन्हे कट्टरवादी के रूप् में दर्शाया जाता है। वास्तव मे ऐसी ग़लत जानकारियॉ और झूठे प्रचार अकसर मुसलमानों के विरूद्ध हिंसा और पक्षपात का कारण बनते हैं। इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण अमेरिकी मीडिया द्वारा मुसलमानों के विरूद्ध चलाए जाने वाली...

क़ुरबानी और इस्लाम

शाकाहार ने अब संसार भर में एक आन्दोलन का रूप् ले लिया हैं। बहुत से तो इसको जानवरों के अधिकार से जोड़ते हैं। निस्संदेह लोगों की एक बड़ी संख्या मांसाहारी हैं और अन्य लोग मांस खाने को जानवरों के अधिकारों का हनन मानते हैं।
इस्लाम प्रत्येक जीव एवं प्राणी के प्रति स्नेह और दाया का निर्देश देता हैं। साथ ही इस्लाम इस बात पर भी जोर देता हैं कि अल्लाह ने पृथ्वी, पेड़-पोधे और छोटे-बड़े हर प्रकार के जीव-जन्तुओं को इंसान के लाभ के लिए पर्दा किया हैं। अब यह इन्सान पर निर्भर करता है कि वह र्इश्वरर की दी हुर्इ...

आतंकवाद और इस्लाम

कुछ गै़र-मुस्लिम की यह आम शिकायत हैं कि संसार भर में इस्लाम के माननेवालों की संख्या लाखों में नही होती यदि इस धर्म को बलपूर्वक नहीं फैलाया गया होता। निम्न बिन्दु इस तथ्य को स्पष्ट कर देंगे कि इस्लाम की सत्यता, दर्शन और तर्क ही हैं जिसके कारण वह पूरे विश्व में तीव्र गति से फैला न कि तलवार सें।

1- इस्लाम का अर्थ शान्ति हैं
इस्लाम मूल शब्द ‘सलाम’ से निकला हैं जिसका अर्थ है ‘शान्ति’। इसका दूसरा अर्थ हैं अपनी इच्छाओं को अपने पालनहार खु़दा के हवाले कर देना। अत: इस्लाम शान्ति का धर्म हैं जो...

औरत की आबरू का आदर इस्लाम में

औरत की आबरू  का आदर इस्लाम मेंतीसरी अहम चीज इस्लाम के दिये हुये मानव-अधिकारों में यह है। कि औरत की अस्मत और इज्ज्ात कर हाल मे आदर के योग्य हैं, चाहे औरत अपनी कौम की हो, या दुश्मन कौम की, जंगल बियाबान मे मिले या फतह किये हुये शहर में, हमारी अपने मजहब की हो या दूसरे मजहब से उसका ताल्लुक हो, या उसका कोर्इ भी मजहब हो, मुसलमान किसी हाल में भी उस पर हाथ नही डाल सकता। उसके लिये जिना को हर हाल में हराम किया गया हैं चाहे यह कुकर्म किसी भी औरत से किया जाये। कुरआन के शब्द हैं-’’ जिना के करीब भी न फटको। (17:32) और उसके साथ ही यह भी किया गया हैं कि इस काम...

बहु विवाह और इस्लाम

बहु-विवाह की परिभाषा-इसका अर्थ हैं ऐसी व्यवस्था जिसके अनुसार व्यक्ति की एक से अधिक पत्नी अथवा पति हों। बहु-विवाह दो प्रकार के होते हैं-

1- एक पुरूष द्वारा एक से अधिक पत्नी रखना।
2- एक स्त्री द्वारा एक से अधिक पति रखना।
इस्लाम में इस बात की इज़ाजत हैं कि एक पुरूष एक सीमा तक एक से अधिक पत्नी रख सकता हैं जबकि स्त्री के लिए इसकी इज़ाजत नहीं हैं कि वह एक से अधिक पति रखें।
अब इस प्रश्न पर विचार करते हैं कि इस्लाम में एक आदमी को एक से अधिक पत्नी रखने की इजा़जत क्यों है?

इतिहास के साथ यह अन्याय!!

उड़ीसा के भूतपूर्व राज्यपाल, राज्यसभा के सदस्य और इतिहासकार प्रो0 विशम्भरनाथ पाण्डेय ने अपने अभिभाषण और लेखन मे उन ऐतिहासिक तथ्यों और वृतान्तों को उजागर किया हैं, जिनसे भली-भाति स्पष्ट हैं कि इतिहास को मनमाने ढंग से तोड़ा-मरोड़ा गया हैं। उन्होने कहा-
‘‘कुछ मैं कुछ ऐसे उदाहरण पेश करता हू, जिनसे यह स्पष्ट हो जायेगा कि ऐिहासिक तथ्यों को कैसे विकृत किया जाता हैं।
जब मैं इलाहाबाद में 1928 र्इ0 में टीपू सुल्तान के सम्बन्ध मे रिसर्च कर रहा था, तो ऐंग्लों-बंगाली कालेज के छात्र-संगठन के कुछ...

कुरआन पर अनुचित आक्षेप

कुरआन और गैर-मुस्लिम
कुछ संस्थाओं और लोगो ने यह झूठा प्रचार किया हैं और निरन्तर किए जा रहे हैं कि कुरआन गैर-मुस्लिम को सहन नही करता। उन्हे मार डालने और जड़-मूल से खत्म कर देने की शिक्षा देता हैं।

कुरआन मजीद की शिक्षाएं समाज देश तथा आम इन्सानो, विशेषकर गैर-मुस्लिम के सम्बन्ध में क्या है, संक्षेप में यहां प्रस्तुत की जा रही हैं। इससे यह अंदाजा हो सकेगा कि कुरआन की शिक्षाए मानव समाज के लिए कितनी अधिक कल्याणकारी हैं और आपत्तिकर्ताओं का दुष्प्रचार कितना अन्यापूर्ण दुर्भाग्यपूर्ण और...

धर्म का वास्तविक स्वरूप (मूल आधारों की खोज)

एक ही पूज्य

अहोरात्राणि विदधद्विश्वस्य मिषतोवशी।
सूर्याचन्द्रमासी धाता यथापूर्वमकल्पयत्।।
दिवं च पृथिवी चासन्तरिक्षमथो स्व: (ऋ0 10/190/2-3)


‘‘उसी र्इश्वर ने दिन और रात रचा। निमिष आदि से युक्त विश्व का वही अधिपति है। पूर्व के अनुसार ही उसने सूर्य, चन्द्र, स्वर्ग लोक, पृथ्वी और अन्तरिक्ष को रचा।’’

पशु-बलि (कुरबानी) और इस्लाम

पशु-बलि को विश्व के दो बड़े धर्मो, सनातन धर्म और इस्लाम धर्म में मान्यता प्राप्त हैं; सनातन धर्म के अनुसार ‘देवताओं को प्रसन्न करने के लिए’। और इस्लाम धर्म के अनुसार ‘अल्लाह को प्रसन्न करने के लिए’ पशु-बलि का विधान हैं। सनातन धर्म में ‘देवताओ। को प्रसन्न करने’ से क्या अभिप्रेत हैं और मनुष्य के आध्यात्म, आचार-विचार एवं चरित्र व आचरण पर पशु-वध के क्या अच्छे प्रभाव पड़ते हैं तथा मनुष्य के व्यक्तिगत व सामाजिक जीवन मे नैतिक स्तर पर, पशु-वद्य द्वारा कैसे सकारात्मक प्रभाव पड़ने अपेक्षित हैं यह इस लेख...