By: सैयद अबुल आला मौदूदी (रह0)
भाइयों! यदि कोर्इ व्यक्ति आपसे कहे कि बाजार में एक दुकान ऐसी हैं, जिसका कोर्इ दुकानदार नही हैं, न कोर्इ उसमें माल लानेवाला हैं न बेचनेवाला और न कोर्इ उसकी...
By: स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य
जब मुझे सत्य का ज्ञान हुआ
कर्इ साल पहले दैनिक जागरण मे श्री बलराज मधोक का लेख ‘दंगे क्यों होते हैं?’’ पढ़ा था। इस लेख में हिन्दू-मुस्लिम दंगा...
By: इस्लाम में बलात्धर्म परिवर्तन नहीं, जिहाद और ज़िज्या की वास्तविकता: अबू मुहम्मद इमामुद्दीन-रा
जिहाद ही तरह जिज़्या को लेकर भी इस्लाम के विरूद्ध बड़ा दुष्प्रचार किया गया हैं और यह गलतफहमी उत्पन्न कर दी गर्इ हैं कि जिज्या का उद्देश्य भी...