सीधी-सच्ची राह दिखानेवाले: अविभाजित पंजाब के प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता और...

सीधी-सच्ची राह दिखानेवाले

अविभाजित पंजाब के प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता और विद्धान डाक्टर सत्यपाल लिखते हैं-

        ‘‘ जिस समय हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) पैदा हुए, सारे अरब में मूर्तिपूजा जोरो पर थी। हर और शिर्क (बहुदेव-पूजा) का दौरा-दौरा था। र्इश्वर का विश्वास लुप्त हो रहा था। अत्याचार, दमन और बलातु हिंसा के समय तो अवश्य र्इश्वर को पूज लिया जाता था, लेकिन उसकी नित्य और वास्तविक उपासना से लोग कोसो दूर थे। कुसंस्कारों और धार्मिक पाखण्डों का जोर था। लेकिन र्इश्वरीय आज्ञापालन का नाम न था। ऐसे समय में आपने इस ज्ञान से र्इश्वर के एकत्व की घोषणा की कि उसकी गूॅज से अरब में एक नर्इ दुनिया आबाद हो गर्इ। हजरत मुहम्मद (सल्ल0) को लोगों ने तरह-तरह के कष्ट दिए, क्योंकि आप अद्वितीय र्इश्वर का सन्देश सुनाते थे। आपको लोगों ने बहुत परेशान किया, क्योकि आप लोगो का एक पूज्य की ओर आकर्षित करते थे। लेकिन ऐसे महान और तेजस्वी व्यक्ति इन कठिनार्इयों से कब भयभीत होते हैं, जो अपने आपको र्इश्वर की गोद मे पाते हैं। वे दुनिया वालों को कब ध्यान में लाते हैं दुनिया से वे कब डरते हैं, जिनके सर पर दुनिया के मालिक का हाथ हैं? दुनिया उन्हे खरीद नही सकती, न वे अपमान से घबराते हैं, न प्रशंसा से प्रभावित होते हैं। उनकी दृष्टि में इन चीजों को कोर्इ मूल्य नही होता। साधारण लोग यह ख्याल करते हैं कि हजरत मुहम्मद साहब एक विशेष सम्प्रदाय, एक विशेष जाति या किसी विशेष देश के पथ-प्रदर्शक हैं। (हालाकि सत्य यह हैं कि आप सम्पूर्ण जगत की मानव-जाति के लिए पथ-प्रदर्शक बनाकर भेजे गए हैं। ) और यही कारण हैं कि विश्व भर में आज करोड़ों मुसलमान दिन में कर्इ बार र्इश्वर के इस पवित्र सन्देशदाता का नाम श्रद्धा और प्रेम से लेते हैं। लेकिन उनसे कहीं बढ़कर वे लोग हजरत के प्रशंसक है जो यद्यपि मेरे समान उनकी घोषणा में अपनी धीमी आवाज शामिल करते हैं और जो दिन-रात हजरत मुहम्मद (सल्ल0) के इस कारनामें को याद करते हैं कि आपने भूली-भटकी दुनिया को नए सिरे से वास्तविक सत्यमार्ग दिखाया और सत्य निष्ठा का पाठ पढ़ाया ।

हजरत मुहम्मद साहब यदि अपने जीवन में और कुछ न भी कर पाते तो केवल शिर्क (बहुदेववाद) को दूर करना और एकेश्वरवाद की स्थापना ही एक ऐसा कारनामा हैं कि दुनिया मे उन्हें चिरस्थार्इ जीवन का अधिकार प्राप्त होता। लेकिन हजरत ने संसार निवासियों के लिए वर्तमान और भविष्य की चेष्टा और प्रगति करने के लिए भी पथप्रदर्शक दीप प्रज्वलित किया है। हजरत का आत्म-त्याग, उनका आत्म-संयम और उनका आत्म-विश्वास हम सबके लिए मार्ग-दर्शन का काम देते हैं। हजरत मुहम्मद साहब ने संसार में समता के सिद्धान्त को जन्म देकर उसे कार्यान्वित करके दिखा दिया। आपने बताया कि र्इश्वर के निकट सारे मनुष्यों का दर्जा एक हैं। उसके दरबार में केवल धन और बुद्धि  को ही प्रधानता नही दी जाती जो भी उसका हो गया । निर्घन हो या धनी, राजा हो या प्रजा, जिसने र्इश्वरीय आज्ञापालन को अपना जीवन-लक्ष्य बना लिया उसने सर्वोच्च पद प्राप्त कर लिया। र्इश-उपासना के द्वार सबके लिए खुले हैं, उॅचे-नीच का भेद अनुचित हैं, यही नही अन्य सांसारिक मामलों में भी हजरत ने परस्पर समानतापूर्ण व्यवहार का आदेश दिया हैं।’’(’तर्जुमान-बनारस, जुलार्इ, 1930 र्इ0)

Author Name: इमामुद्दीन रामनगरी: मधुर सन्देश संगम