अत्यन्त क्षमाशील विजेता, ‘ स्पीचेज ऑफ मुहम्मद’: में प्रसिद्ध इतिहासकार...

‘‘ हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) का व्यक्ति दया और शौर्य दोनो का सम्मिश्रण हैं। वे वर्षो तक अकेले अपने देशवासियों की शत्रुता का सामना करते रहे। मुहम्मद (सल्ल0) इतने सुशील थे कि हर एक से प्रफुल्ल-मुख के साथ मिलते थे। उनकी निष्कपट मित्रता, सहानुभूति, उदार हदयता, वीरता और शौर्य प्रशंसनीय हैं। जब दस हजार आदमियों के साथ वे मक्का में विजेता की हैसियत से दाखिल हुए तो मुहम्मद (सल्ल0) के लिए यह समय क्रूरता दिखाने और सारी दुष्टताओं का बदला लेने का था। क्योंकि आपकों सतानेवाले और द ुख देनेवाले आपके अधिकार में थे और पूर्णरूप से उनसे प्रतिशोध लिया जा सकता था। लेकिन आपने कुरैश तथा मक्का वासियों के सारे अपराध क्षमा कर दिए और सेना नितान्त शान्ति पूर्वक नगर में प्रविष्ट हुर्इ। न कोर्इ घर लूटा गया, न कोर्इ स्त्री अपमानित की गर्इ और न किसी का रक्त बहाया गया। देश-विजय के इतिहास में इस प्रकार के विजय-प्रवेश का कोर्इ उदाहरण नही मिलता।’’

अत्यन्त नम्र स्वभाव के सुधारक

डब्लू इर्विग लिखते हैं-

        ‘‘ हजरत मुहम्मद(सल्ल0) अत्यन्त नम्र स्वभाव के सुधारक थे।
आपके बौद्धिक गुण असाधारण और आपकी कल्पना-शक्ति उत्तम कोटि की थी। आप बड़े ही तीव्र बुद्धि , अत्यन्त संयमी और सदाचारी थे। आप अपने और पराए, धनी और निर्धन, बलवान और निर्बल, युवक और वृद्ध सबके साथ एक समान न्यायपूर्ण व्यवहार करते, साधारण लोगों से बड़े प्रेम और सहानुभूति से मिलते। ऐसे स्थार्इ संयमी और सदाचारी सुधारक पर दोषारोपण करना भ्रष्टतापूर्ण भूल हैं।’’

Author Name: इमामुद्दीन रामनगरी: मधुर सन्देश संगम