पैग़म्बरी की सत्यता

आप देखते हैं संसार में मनुष्य को जिन-जिन चीजों की आवश्यकता होती हैं, अल्लाह ने उन सबका इन्तिजाम स्वयं ही कर दिया हैं। बच्चा जब पैदा होता हैं, तो देखिए कितनी सामग्री उसे देकर संसार में भेजा जाता हैं। देखने के लिए ऑखे, सुनने के लिए कान, सूघने और सॉस लेने के लिए नाक, स्पर्श-ज्ञान के लिए सम्पूर्ण शरीर की त्वचा में अनुभव-शक्ति चलने के लिए पॉव, काम करते के लिए हाथ, सोचने के लिए मस्तिरूक और ऐसी ही बेशुमार दूसरी चीजें जो पहले से उसकी सब जरूरतों का ध्यान रखते हुए, उसके छोटे से छोटे शरीर में लपेट कर रख दी गर्इ हैं। फिर जब वह दुनिया में क़दम रखता हैं तो जीवन-यापन के लिए इतनी सामग्री उसको मिलती है जिसकीी आप गणना भी नही कर सकते। वायु हैं, प्रकाश हैं, ताप हैं, जल हैं, पृथ्वी हैं, मॉ के स्तन में पहले से दूध मौजूद हैं, माता-पिता और सम्बन्धी, यहॉ तक कि दूसरे लोगो के दिलों में भी उसके प्रति प्यार और वात्सल्य पैदा कर दिया गया हैं जिससे उसका पालन-पोषण होता हैं। फिर जितना-जितना वह बढ़ता जाता हैं उसकी जरूरतों की पूर्ति के लिए हर प्रकार का सामान उसकों मिलता जाता है और ऐसा लगता हैं मानों धरती और आकाश  की समस्त शक्तियॉ उसके पालन-पोषण और सेवा के लिए कार्य कर रही हैं।

इसके बाद और आगे बढ़िए। दुनिया के काम करने के लिए जितनी योग्यताओं की आवश्यकता हैं, वे सब मनुष्य को दी गर्इ हैं, शरीरिक शक्ति, समझ-बूझ, बोलने की शक्ति और ऐसी ही बहुत-सी योग्यताएॅं थोड़ी या बहुत, हर मनुष्य में पार्इ जाती हैं, परन्तु यहॉ अल्लाह ने अद्भुत प्रबंध किया हैं कि समस्त योग्यताएॅ सब मनुष्यों को सामान रूप से नही दीं। यदि ऐसा होता तो कोर्इ किसी का मोहताज न होता, न कोर्इ किसी की परवाह करता। इस लिए र्इश्वर ने समस्त मनुष्यों की सामूहिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समस्त योग्यताएॅ पैदा तो मनुष्यों ही में की परन्तु इस तरह की किसी को एक योग्यता अधिक दें दी और दूसरी योग्यता, आप देखते हैं कि कुछ लोग शारीरिक परिश्रम की शक्तियॉ दूसरे से अधिक लेकर आते हैं। कुछ लोगो में किसी विशेष कला या व्यवसाय की जन्मसाय योग्यता होती हैं, जिससे दूसरे वंचित होते हैं। और कुछ लोगों में बुद्धि की तीव्रता और बौद्धिक शक्ति दूसरों से अधिक होती हैं। कुछ जन्मजात सेनानी होते हैं। कुछ में प्रशासन की विशेष योग्यता होती हैं। कुछ भाषण की असाधारण शक्ति लेकर पैदा होते हैं। कुछ लिखने की स्वाभाविक प्रतिभा पार्इ जाती हैं। कोर्इ व्यक्ति ऐसा पैदा होता हैं कि उसकी बुद्धि गणित में अधिक काम करती हैं यहॉ तक कि उसके बड़े-बड़े जटिल प्रश्नों को इस तरह वह हल कर देता हैं कि दूसरों की बुद्धि वहॉ तक पहुॅचती। एक दूसरा व्यक्ति ऐसा होता हैं कि जो अद्भुत चीजों का आविष्कार करता हैं और उसके आविष्कारों को देखकर संसार चकित रह जाता हैं। एक और व्यक्ति ऐसा अनुपम का़नूनी दिमाग़ लेकर आता हैं कि कानून की जो सूक्ष्म और मर्म की बातें वषोर्ं तक विचारकरने पर भी दूसरों की समझ में नही आती नजर अपने-आप उन तक पहुॅच जाती हैं, यह र्इश्वरीय देन हैं। कोर्इ व्यक्ति स्वयं ये योग्यताएॅ अपने अन्दर पैदा नही कर सकता। न शिक्षा-दीक्षा से ये चीजें पैदा होती हैं। वास्तव में ये जन्मजात योग्यताए हैं और र्इश्वर अपनी तत्वदर्शिता (Wisdom) से जिसकों यह योग्यता चाहता हैं प्रदान कर देता हैं।

र्इश्वर की इस देन पर भी विचार करेंगे तो आपको मालूम होगा कि मानव-संस्कृति के लिए जिन योग्यताओं की जरूरत अधिक होती हैं वे अधिकमनुष्यों में पैदा की जाती हैं और जिनकी आवश्यकता जितनी कम होती हैं वे उतने ही कम मनुष्यों में पैदा की जाती हैं। सैनिक अधिक पैदा होते हैं।किसान और बढ़र्इ और लुहार ऐसे ही दूसरें कामों के आदमी अधिक पैदा होते हैं, परन्तु ज्ञान-सम्बन्धी और बौद्धिक शक्तियॉ रखनेवाले और राजनीति और सेनापति की योग्यता रखने वाले अधिकारी कम पैदा होते हैं, फिर वे लोग और भी कम मिलते हैं जो किसी विशेष विद्या और कला में आसाधारण योग्यता के अधिकारी हो, क्योकि उनके महान कार्य के कारण शताब्दियो तक लोगो को उन जैसे कुशल जानकार की आवश्यकता नही रहती ।

अब सोचना चाहिए कि संसार में मानव-जीवन को सफल बनाने के लिए केवल यही एक आवश्यकता तो नही है कि लोगो में इन्जीनियर, गणितज्ञ, वैज्ञानिक, कानूनविद, राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्र, के आचार्य और विभिन्न पेशों की योग्यता रखनेवाले लोग ही पैदा हों। इन सबसे बढ़कर एक और आवश्यकता भी तो है और वह यह कि कोर्इ ऐसा हो जो लोगों को र्इश्वरीय मार्ग बताए। दूसरे लोग तो केवल यह बतानेवाले हैं  िकइस संसार में मनुष्य के लिए क्या हैं, और उसको किस प्रकार इस्तेमाल में लाया जा सकता हैं, परन्तु कोर्इ यह बतानेवाला भी तो होना चाहिए कि मनुष्य स्वयं किस लिए हैं? और मनुष्य को संसार में यह सब समग्री किसने दी हैं? और उस देनेवाले की इच्छा क्या हैं? ताकि मनुष्य उसी के अनुसार संसार में जीवन व्यतीत करके निश्चित एवं शाश्वत सफलता प्राप्त करे। यह मनुष्य की वास्तविक और सबसे बड़ी जरूरत है और बृद्धि यह मानने से इन्कार करती हैं कि जिस र्इश्वर ने हमारी छोटी से छोटी जरूरतों को पूरा करते का प्रबन्ध किया हैं, उसने ऐसी महत्वपूर्ण आवश्यकता की पूर्ति असावधानी से काम लिया होगा। नही, ऐसा कदापि नही हैं। र्इश्वर ने जिस प्रकार एक-एक विद्या और एक-एक कला एवं ज्ञान की विशेष योग्यता रखनेवाले व्यक्ति पैदा किये हैं उसी प्रकार ऐसे व्यक्ति भी पैदा किए हैं जिनमें स्वयं र्इश्वर को पहचानने की उत्तम योग्यता थी। उसने उन्हे धर्म (दीन) नैतिकता और आचारशास्त्र (शरीअत) का ज्ञान अपने पास से दिया और उन्हे इस सेवा-कार्य पर नियुक्त किया कि दूसरे लोगो को इन चीजों की शिक्षा दें। यही वे लोग हैं जिनको हमारी भाषा में ‘नबी’ या रसूल या पैग़म्बर (र्इशदूत या सन्देष्टा) कहा जाता हैं।

Author Name: इस्लाम धर्म: सैयद अबुल आला मौदूदी (रहo)