विवाह और तलाक

महिलाओं से सम्बन्धित एक और महत्वपूर्ण विषय विवाह और तलाक का भी हैं। विवाह जिसे निकाह कहा जाता हैं एक पुरूष और एक स्त्री का अपनी आजाद मर्जी से एक दूसरें के साथ पति और पत्नी के रूप मे रहने का फैसला हैं। इसकी तीन शर्ते हैं : पहली यह कि पुरूष वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों को उठाने की शपथ ले, एक निश्चित रकम जो आपसी बातचीत से तय हो, मेहर के रूप में औरत को दे और इस नये सम्बन्ध की समाज मे घोषणा हो जाये। इसके बिना किसी मर्द और औरत का साथ रहना और यौन सम्बन्ध स्थापित करना गलत, बल्कि एक बड़ा अपराध हैं।

पर यह सम्बन्ध दोनो में से किसी एक की इच्छा पर खत्म भी हो सकता हैं, जिसका अधिकार इस्लाम देता हैं। इसी का नाम तलाक या सम्बन्ध-विच्छेद हैं। इसका एक नियम और तरीका हैं, स्त्री के लिए भी पुरूष के लिए भी कि यदि उन मे से कोर्इ इस वैवाहिक जीवन से संतुष्ट न हो और मिल कर रहना सम्भव न रह जाये तो बतायें हुए तरीके से-कर्इ चरणो मे-दोनो अलग हो जाये और चाहे तो दूसरा विवाह कर ले। तलाक कोर्इ मजाक नही। कोर्इ यदि इसे गम्भीरता से न ले तो यह उस व्यक्ति का दोष होगा, नियम का नही।

तलाक को इस्लाम ने बिल्कुल की हालत मे देने की अनुमति दी है, वरना इस के बुरे नतीजों को देखते हुए मर्द को इससे रोका गया है। अल्लाह के रसूल (सल्ल0) ने कहा:

‘‘कोर्इ मोमिन अपनी बीबी से नफरत न करे। अगर उसे उसकी एक आदत नापसन्द हैं तो दूसरी आदत पसन्द हो सकती है। (मुस्लिम)

अगर पति-पत्नी तलाक पर आमादा ही हो तो इस्लामी तरीका यह हैं कि तलाक का आखिरी फैसला करने से पहले एक-दो आदमी लड़के की और से और एक-दो लड़की की ओर से मिल बैठे और कोर्इ ऐसी सुरत निकाले कि आपस मे दोनो का मेल-मिलाप हो जाए और तलाक की नौबत न आए। लेकिन अगर किसी तरह समझौता न हो सके और तलाक के सिवा कोर्इ चारा न हो तो फिर मर्द, औरत को सिर्फ एक तलाक दे यानी कहे कि मैने मुझे तलाक दी। तलाक दो इन्साफ करने वाले गवाहों की मौजूदगी में दी जाये। तलाक ‘तुहर’ की हालत (यानी माहवारी के बाद की हालत) में दी जाय, जिस में शौहर ने बीबी के साथ सोहबत न की हो।

तलाक के बाद औरत को ‘इद्दत’ यानी एक खास मुद्दत गुजारनी होगी। इस मुद्दत में मर्द फिर से औरत को अपना सकता हैं। अगर मर्द अपनाने के तैयार न हो तो औरत अलग हो जायेगी। अगर बाद में दोनो चाहे तो दोबारा निकाह हो सकता है। इस्लाम मे तलाक का यही सही तरीका हैं। इस मे मर्द को सोच चिवार का काफी मौका मिल जाता हैं।

अगर औरत मर्द से अलग होना चाहती है, तो वह मर्द से ‘खुलअ’ करा सकती हैं।

Author Name: इस्लाम और मानव समाज :सैयद मुहम्मद इकबाल