र्इसार्इ डा0 स्पिरिंगर

मुहम्मद (सल्ल0) के विचार में सदा ख़ुदा ही की कल्पना रहती थी और उनको निकलते हुए सूरज, बरसते हुए पानी और उगती हुर्इ हरयाली में खु़दा ही का हाथ दिखार्इ था और बादल की गरज, पानी की आवा़ज र्इश्वर की प्रशंसा में गाए जाने वाले चिड़ियों के गान में उनको र्इश्वर ही की सुनार्इ देती थी और सुनसान जंगलों और पुराने शहरों के खंडहरों में खुदा ही के प्रकोपों के चिह्न दिखार्इ देते थें।’’
(एजाजुत्तंजील पृष्ठ 30, ‘लाइफ़ ऑफ मुहम्मद’ पृष्ठ 82, से उद्वृत डॉ0 स्पिरिंगर द्वारा लिखित और 1851 में इलाहाबाद से प्रकाश)
  
महानतम् व्यक्ति

कुरआन के (अंगे्रजी) अनुवादक श्री जी0एम0 रॉडवेल लिखते हैं-

    ‘‘ यह अद्भुत और आश्चर्यजनक नमूना हैं उस शक्ति और आत्मा का जो ऐसे शख्स मे होती हैं जिसको खु़दा और परलोक पर दृढ़ता के साथ विश्वास होता हैं और जो अपने महान व्यक्तित्व और सत्यतापूर्ण आचरण के कारण हमेशा उन लोगो में गिना जाएगा जिनको मानव-जाति के विश्वास, आचार-विचार और सारे सांसारिक जीवन पर ऐसा पूर्ण अधिकार प्राप्त होता हैं जो किसी अत्यन्त महान कोटि के व्यक्ति के सिवा किसी और को नही प्राप्त हुआ और न हो सकता हैं।’’

(एजाजुतॅजील पृ0 30, कुरआन के अंग्रेजी अनुवाद की भूमिका पृ0 23, मुद्रित 1861 र्इ0)

Author Name: इमामुद्दीन रामनगरी: मधुर सन्देश संगम