कुरआनी शिक्षा

दया की शिक्षा

‘‘दया करनेवालों पर महादयावान (र्इश्वर) दया करता हैं। तुम धरतीवालों पर दया करो, तुम पर आकाशवाला दया करेग। (मिशकात)

पैगम्बर हजरत मुहम्मद (सल्ल0) ने फरमाया-

‘‘तुम जब एक-दूसरे पर दया न करो कदापि मुसलमान नही हो सकते।’’ लोगो ने कहा- ‘‘ऐ अल्लाह के पैगम्बर! हम सभी दया करनेवाले हैं।’’ आपने फरमाया- ‘‘तुममे से किसी व्यक्ति का केवल अपनों के साथ दया करना पर्याप्त नही हैं, बल्कि तुम्हारी दया सर्वसाधारण के लिए होनी चाहिए।’’ (तबरानी)
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सभी के साथ सद्व्यवहार की शिक्षा

‘‘ और र्इश्वर ही की उपासना करो और किसी चीज को उसका समकक्ष न ठहराओ। और माता-पिता के साथ, संबंधियो के साथ, अनाथों के साथ, निर्धनों के साथ, निकटवर्ती पड़ोसी के साथ तथा अजनबी (दूरवर्ती) पड़ोसी साथ, और पास के सहचरों के साथ, यात्री के साथ और उनके साथ जो तुम्हारे अधीन हो, सबके साथ भलार्इ का व्यवहार करो।’’ (कुरआन, 4 : 36)

10- मुसलमानों विशेषताएं
कुरआन मजीद मे अनेक स्थानों पर ऐसे गुणों को उल्लेख किया गया हैं जिनका मुसलमानों में होना आवश्यक है। हम नीचे उन गुणों का सार दे रहे हैं-
(i) उन र्इमानवालों ने सफलता...
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दोष क्षमा करने की शिक्षा

एक स्थान पर यह बताते हुए कि स्वर्ग किन लोगो के लिए हैं तथा उनकी विशेषताए क्या हैं? कहा गया हैं-

(स्वर्ग उन लोगो के लिए है) जो सुख हो या दुख दोनो हालतों में परमार्थ के कामों में (धन) खर्च करते हैं और क्रोध को पी जाते हैं और लोगो के दोष क्षमा कर देते हैं।’’ (कुरआन, 3 :134)
एक स्थान पर पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) को सम्बोधित करके कहा गया हैं-

‘‘ऐ पैगम्बर! र्इश्वर की कृपा से तुम इन लोगो के प्रति नम्रताशील हो। यदि तुम क्रूर स्वभावी एवं कठोर हृदय होते तो लोग तुम्हारे पास से भा जाते। अत: इन लोगो का दोष क्षमा...
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न्याय की शिक्षा

‘‘ ऐ र्इमानवालों (मुसलमानों)! र्इश्वर के लिए न्याय की गवाही देने हेतु खड़े हो जाया करो और लोगों की दुश्मनी तुमकों इस बात पर तत्पर न करे कि तुम न्याय न करो। तुमको चाहिए कि (हर अवस्था में) न्याय करो, यही बात धर्मपरायणता से अधिक निकट है तथा र्इश्वर से डरते रहो। निस्संदेह! र्इश्वर उन तमाम कामों का ज्ञान रखता हैं जो तुम करते हो।’’ (कुरआन, 5:8)

‘‘र्इश्वर तुम कों आदेश देता हैं न्याय का, सदव्यवहार का और निकट संबंधियों को देने का और मना करता है निर्लज्जता से, दुष्कर्मो से तथा अतिक्रमण से। वह तुम्हे इन बातों...
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उपहास करने की मनाही

‘‘मुसलमानों! कोर्इ जाति (पुरूषो का कोर्इ समूह) किसी जाति (पुरूषों के किसी समूह न करे। संभव हैं वे अच्छे हो। और औरतें (भी दूसरी) औरतों का उपहास न करे, हो सकता है कि वे उनसे अच्छी हों। ( कुरआन, 49 :11)

7- दुर्भावना तथा परनिन्दा की मनाही

‘‘(किसी के प्रति) अत्याधिक गुमान से बचो क्योकि अनेक पाप होते हैं और एक-दूसरे की गुप्त बातों की जिज्ञासा न किया करो और न एक-दूसरे के पीठ निन्दा किया करो। क्या तुम में से कोर्इ इस बात को पसंद करता हैं कि अपने मुर्दा भार्इ का गोश्त खाए। उससे तो तुम अवश्य घृणा करोगे।...
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कुरआन और राजनीकि व्यवस्था

वास्तविक शासक
कुरआन के दृष्टिकोण से यह सारा ब्रहम्माण्ड जिस सृष्टिकर्ता ने रचा हैै वही इसका संचालक भी हैं। वह जिसको चाहता है उसको शासक बना देता हैं और जिसे चाहता है ंउससे शासन छीन लेता है। उसके विचारों पर कोर्इ सत्ता प्रभाव नही डाल सकती। कुरआन मे हैं:

कहो ! हे प्रभु राज्य सत्ता के स्वामी। तू जिसे चाहे राजपाट दे दे और जिसे चाहे छीन ले, जिसे चाहे इज्जत दे और जिसे चाहे रूसवा कर दे। तेरे ही हाथ मे सारी भलार्इ हैं। बेशक, तू प्रत्येक चीज पर सामथ्र्य रखता है। (कुरआन , 3 : 26 )
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कुरआन और ज्ञान-विज्ञान

कुछ लोगो का ख्याल है कि धर्म ज्ञान एक जगह नही हो सकते, उनके विचारों मे क्योकि धर्म की रूप-रेखा अंधविश्वास पर आधारित हैं, जहां ज्ञान की रौशनी पहुंच कर हलचल मचा देती हैं। इसलिए धार्मिक पुरूषों ने लोगो के ज्ञान प्राप्त करने पर रोक लगा रखी हैं। यही वजह थी कि जब यूरोप मे ज्ञान रौशनी फैली तो पोप व्याकुल हो उठे और जिन्होने र्इसार्इ मत को बचाने के लिए विद्धानों की कड़ी आलोचना शुरू कर दी, यहां तक कि सैकड़ो वैज्ञानिक फांसी के तख्ते पर लटका दिए गए और उनकी मेहनत के फल को आग में डाल दिया गया, जिसके नतीजे मे ऐसे...
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कुरआन और अल्लाह की महान सत्ता

कुरआन र्इश्वर की महान सत्ता को विभिन्न प्रकार से बयान करता हैं। पृथ्वी और आकाश मे जो कुछ भी हैं सबको उसी ने बताया हैं। इसलिए कण-कण उसकी महान सत्ता के गीत गाते हैं और उसी की बड़ार्इ बयान करते हैं। अब यह मनुष्य की गलती हैं कि अपने जैसों को र्इश्वर बना बैठे और उनकी उपासना करे। आइए कुरआन की कुछ आयतों (श्लोक) का अध्ययन करे और उसकी महान सत्ता का गुणगान करें।

‘‘ या फिर उदाहरण के रूप में उस व्यक्ति को देखों, जिसका एक ऐसी बस्ती पर से जाना हुआ जो अपनी छतों पर आंधी गिरी पड़ी थी। उसने कहा: ‘‘यह आबादी, जो...
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