इस्लाम आप के लिए

इस्लाम का अभ्युदय क्यों हुआ?

यह एक अटल प्राकृतिक नियम हैं कि जब पाप की अधिकता हो जाती हैं, अत्याचार और हिंसा करनेवालो की संख्या बढ़ जाती हैं: नेक और पवित्र मनुष्य सताए जाने लगते हैं, खुदा के बन्दे पुण्य के रास्ते से हटकर पाप के रास्ते पर चलने लगते हैं, अत्याचार और क्रूरता को धर्म बना लेते हैं, अपनी जिन्दगी के मकसद को भूलकर अपनी आत्माओं को अपवित्र और कलुषित कर लेते हैं, उस समय अत्याचार-पीड़ित और दुखी लोगो की सहायता करनेवाला और जोर-जबरदस्ती और हिंसा को खत्म करनेवाला सबका मालिक अपनी दया और अपनी कृपा से ऐसे पवित्र और महान...
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इस्लाम मे पवित्र कमार्इ का महत्व

इस्लाम मे पवित्र कमार्इ पर बड़ा जोर दिया गया हैं और एक सम्पूर्ण जीवन-व्यवस्था में ऐसा होना अनिवार्य भी हैं। पवित्र कुरआन हैं-

‘‘ ऐ लोगो ! जो वस्तुएं धरती पर पार्इ जाती हैं, उनमें से अवर्जित (हलाल) और पवित्र वस्तुओं खाओं और शैतान का अनुसरण न करो। वास्तव में वह तुम्हारा खुला शत्रु हैं।’’ - कुरआन, 2:168

‘‘ ऐ र्इमानवालों। जो पवित्र वस्तुएं हमने तुमको प्रदान की हैं, उनमें से खाओं और अल्लाह की प्रशंसा व शुक्र करो, यदि वास्तव मे तुम उसी की उपासना करनेवाले हो’’। -कुरआन, 2:172

देखिए,...
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इस्लाम मे पड़ोसी के अधिकार

इस्लाम में पड़ोसी के साथ अच्छे व्यवहार पर बड़ा बल दिया गया हैं। परन्तु इसका उददेश्य यह नही हैं कि पड़ोसी की सहायता करने से पड़ोसी भी समय पर काम आए, अपितु इसे एक मानवीय कर्तव्य ठहराया गया हैं, इसे आवश्यक करार दिया गया हैं और यह कर्तव्य पड़ोसी ही तक सीमित नही है बल्कि किसी साधारण मनुष्य से भी असम्मान जनक व्यवहार न करने की ताकीद की गर्इ हैं। पवित्र कुरआन में लिखी है- कुरआन, 31:18

पडोसी के साथ अच्छे व्यवहार का विशेष रूप से आदेश हैं। न केवल निकटतम पड़ोसी के साथ, बल्कि दूर वाले पड़ोसी के साथ भी...
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इस्लाम और उसकी विशेषताए

संक्षेप में इस्लाम की प्रधान विशेषताए निम्न हैं-
इस्लाम की सबसे प्रधान विशेषता उसका विशुद्ध एकेश्वरवाद हैं। हिन्दू धर्म के र्इश्वर-कृत वेदो का एकेश्वरवाद कालान्तर से बहुदेववाद में खोया तो नही तथापि बहुदेववाद और अवतारवाद के बाद र्इश्वर को मुख्य से गौण बना दिया गया है। इसी प्रकार र्इसार्इयों की त्रिमूर्ति (Trinity) अर्र्थात् र्इश्वर, पुत्र और आत्मा की कल्पना ने हिन्दुओं के अवतारवाद के समान र्इसार्इ धर्म में भी र्इश्वर मुख्य न रहकर गौण हो गया। इसके विपरीत इस्लाम के एकेश्वरवाद में न किसी प्रकार...
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