इस्लाम में अधिकार

इस्लाम में मानव अधिकार

इस्लाम में मानव अधिकार
इस्लाम में मानव अधिकार -: ‘‘इस्लाम में मानव-अधिकार’’के विषय पर मुझे आप से कुछ अर्ज करना है, लेकिन इस से पहले मैं जरूरी समझता हूं कि दो बातों पर अच्छी तरह रोशनी डाल दूं, ताकि बहस के दौरान उनके बारे में कोर्इ उलझन पेश न आये।

पश्चिमी देशों में मानव-अधिकारों की कल्पना
पाश्चात्य लोगो का यह उसूल रहा हैं कि वह हर अच्छी चीज को अपनी बना कर पेश करते हैं और यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि यह नेमत और खूबी बस हमारे जरिये से दुनिया को मिली हैं, वरना दुनिया इन चीजों से नावाकिफ और बेखबर थी। अब जरा इसी...
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इस्लाम में महिलाओं के अधिकार

इस्लाम में महिलाओं के अधिकार
इस्लाम और मुसलमानों के सम्बन्ध में जो ग़लतफहमियॉ पार्इ जाती हैं उनमें से कुछ गलतफहमियॉ औरतों के बारे में हैं।

इस्लाम से पहले आमतौर से हर समाज और हर सोसाइटी में औरत को हीन समझा था। उसका अपमान किया जाता और तरह-तरह के अत्याचारों का उसे निशाना बनाया जाता था।

• भारतीय समाज में पति के मर जाने पर पति की लाश के साथ पत्नी को भी जिन्दा जल जाना पड़ता था।
• चीन में औरत के पैर में लोहे के तंग जूते पहनाए जाते थें।
• अरब में लड़कियों को जीवित गाड़ दिया जाता था।
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इस्लाम में पड़ोसी अधिकार

इस्लाम में पड़ोसी के साथ अच्छे व्यवहार पर बड़ा बल दिया गया हैं। परन्तु इसका उददेश्य यह नही हैं कि पड़ोसी की सहायता करने से पड़ोसी भी समय पर काम आए, अपितु इसे एक मानवीय कर्तव्य ठहराया गया हैं, इसे आवश्यक करार दिया गया हैं और यह कर्तव्य पड़ोसी ही तक सीमित नही है बल्कि किसी साधारण मनुष्य से भी असम्मान जनक व्यवहार न करने की ताकीद की गर्इ हैं। पवित्र कुरआन में लिखी है- कुरआन, 31:18

पडोसी के साथ अच्छे व्यवहार का विशेष रूप से आदेश हैं। न केवल निकटतम पड़ोसी के साथ, बल्कि दूर वाले पड़ोसी के साथ भी...
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