इस्लाम सभी के लिए

इस्लाम - शान्ति-मार्ग

भाइयों! यदि कोर्इ व्यक्ति आपसे कहे कि बाजार में एक दुकान ऐसी हैं, जिसका कोर्इ दुकानदार नही हैं, न कोर्इ उसमें माल लानेवाला हैं न बेचनेवाला और न कोर्इ उसकी रखवाली करता है। दुकान आप-से-आप चल रही है।, आप-से-आप उसमें माल आ जाता हैं और आप-से-आप खरीदारों के हाथ बिक जाता है, तो क्या आप उस व्यक्ति की बात मान लेंगे? क्या आप स्वीकार कर लेंगे कि किसी दुकान में माल लानेवाले के बिना आप-से-आप माल आ भी सकता हैं? माल बेचनेवाले के बिना आप-से-आप बिक भी सकता हैं? हिफाजत करनेवाले के बिना आप-से-आप चोरी और लूट से बचा भी रह सकता...
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इस्लाम की जीवन व्यवस्था

इस्लाम की जीवन व्यवस्था
मानव के अन्दर नैतिकता की भावना एक स्वाभाविक भावना है जो कुछ गुणों को पसन्द और कुछ दूसरे गुणों को नापसन्द करती है। यह भावना व्यक्तिगत रूप से लोगो में भले ही थोड़ी या अधिक हो किन्तु सामूहिक रूप से सदैव मानव-चेतना ने नैतिकता के कुछ मूल्यों को समान रूप से अच्छार्इ और कुछ को बुरार्इ की संज्ञा दी हैं। सत्य, न्याय, वचन पालन और अमानत को सदा ही मानवीय नैतिक सीमाओं में प्रशंसनीय माना गया हैं और कभी कोर्इ ऐसा युग नही बीता जब झूठ, जुल्म, वचन भंग और खियानत को पसन्द किया गया हो। हमदर्दी, दयाभाव, दानशीलता और...
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इस्लाम कैसा इन्सान बनाता?

इन्सान को अच्छा इन्सान बनाने की इस्लाम से बेहतर दूसरी कोर्इ व्यवस्था नही। इस्लाम मनुष्य को उसका सही स्थान बताता हैं, उसकी महानता का रहस्य उस पर खोलता हैं उसका दायित्व उसे याद दिलाता हैं और उसकी चेतना को जगाता हैं उसे याद दिलाता हैं कि उसे एक उद्देश्य के साथ पैदा किया गया हैं, निरर्थक नही। इस संसार का जीवन मौजमस्ती के लिये नही हैं। हमे अपने हर काम का हिसाब अपने मालिक को देना हैं। यहां हर काम खूब सोच-समझ कर करना हैं कि यहां हमारे कामो से समाज सुगन्धित भी हो सकता हैं
और हमारे दुष्कर्मो से एक अभिशाप...
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मानवजाति का संयुक्त धर्म: इस्लाम

इस्लाम किसी एक जाति या एक देश का धर्म नही, यह मानव जाति का संयुक्त धर्म हैं। र्इश्वर की ओर से संसार में जितने धर्म नेता और धर्म शिक्षक आए उन सबका एकमात्र आदेश यही था कि र्इश्वर को मानो, उसी को पूजो और उसी की आज्ञाओं पर चलो। कुरआन मे खुदा कहता है-
‘‘ हमने तुमसे पहले जितने भी रसूले भेजे उनको यही आदेश दिया कि मेरे सिवा कोर्इ पूज्य प्रभु नही अत: तुम मेरी ही बन्दगी करो।’’ (कुरआन,21:25)

‘‘निस्सन्देह हमने हर समुदाय मे रसूल (सन्देष्टा) भेजे जिन्होने यही आदेश दिया कि लोगो! अल्लाह ही की बन्दगी और आज्ञा का...
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इस्लाम का अर्थ

जिस प्रकार संसार मे बहुत-सी जातियॉ और बहुत से धर्म हैं उसी प्रकार मुसलमानों को भी एक जाति समझ लिया गया हैं और इस्लाम को केवल उन्ही का धर्म। लेकिन यह एक भ्रम हैं। सच यह हैं कि मुसलमान इस अर्थ मे एक जाति नही है, जिस अर्थ में वंश, वर्ण और देश के सम्बन्ध से जातियॉं बना करती हैं और इस अर्थ में इस्लाम भी किसी विशेष जाति का धर्म नही हैं। यह समस्त मानव जाति और पूरे संसार का एक प्राकृतिक धर्म और स्वाभाविक जीवन सिद्धांत हैं।
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परलोक और उसके प्रमाण

इस्लाम की परलोक-धारणा र्इश्वर की विविध विशेषताओं एवं गुणों पर आधारित हैं, जिनमें से कुछ ये है:-

 र्इश्वर मालिक और संप्रभुतासंपन्न है।
 र्इश्वर कर्मो का बदला देने वाला हैं।
 र्इश्वर न्यायप्रिय हैं।
 र्इश्वर सर्वशक्तिमान हैं।
 र्इश्वर सब कुछ जानने वाला और सबकी खबर रखने वाला हैं।
 र्इश्वर तत्वदश्र्ाी और बुद्धि संपन्न है।
 र्इश्वर कृपालु और कद्रदान (गुणग्राही) हैं।
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