गलतफहमियों का निवारण

इस्लाम मे हलाल और हराम , पशु-बलि (कुरबानी) और इस्लाम

इस्लाम की विशिष्टता इस संबंध मे यह हैं कि वह अन्य समाजों के विपरीत, मांसाहार के विषय मे एक निश्चित आचार संहिता (Code of conduct) अपने अनुयायियों को प्रदान करता हैं जिसे इस्लामी विधान (शरीअत) की परिभाषा में ‘हलाल’ (वैद्य) और ‘हराम’ (अवैध) कहा गया हैं। इसकी सीमा का निर्धारण स्वयं अल्लाह ने (कुरआन में) कर दिया हैं तथा इसकी विस्तृत व्याख्या अल्लाह के पैगम्बर हजरत मुहम्मद (सल्ल0) के आदर्श (सुन्नत, सीरत व हदीस) में कर दी गर्इ हैं। जैसा कि पहले लिखा जा चुका है कि अल्लाह (र्इश्वर) की तत्वदर्शिता व ज्ञान अपार, असीम और...
READ MORE

मुसलमानों पर पृथकतावाद का आरोप

मुसलमानों पर आरोप लगाया जाता हैं कि वे बड़े पृथकतावादी हैं। औष्ट्रिक, नीग्रो, मंगोल आदि जितनी जातियॉं भारत आर्इ, हिन्दूओं में घुल-मिलकर एक हो गर्इ परन्तु मुसलमान अब तक अपना पृथक अस्तित्व बनाए हुए हैं।

मुसलमानों पर यह आरोप लगानेवाले इसके कारणों पर विचार नही करते। मुसलमानों के पहले जो जातियॉ भारत आर्इ उनके पास न हिन्दुओं के धर्म जैसा धर्म था, न विद्या जैसी विद्या थी, अत: वे हिन्दुओं में घुलमिल गर्इ। किन्तु इसका परिणाम क्या हुआ? हिन्दु धर्म विकृत हो गया। वर्तमान हिन्दु धर्म प्राचीनवैदिक...
READ MORE

‘कुरआन की आयतें, जो अन्य धर्मावलम्बियों से झगड़ा करने का आदेश देती...

जब मुझे सत्य का ज्ञान हुआ
कर्इ साल पहले दैनिक जागरण मे श्री बलराज मधोक का लेख ‘दंगे क्यों होते हैं?’’ पढ़ा था। इस लेख में हिन्दू-मुस्लिम दंगा होने का कारण कुरआन मजीद में काफिरों से लड़ने के लिए अल्लाह के फरमान बताए गए थे। लेख में मजीद में काफिरों से लड़ने के लिए अल्लाह के फरमान बताए गए थें। लेख मे कुरआन मजीद की वे आयते भी दी गर्इ थी।
इसके बाद दिल्ली से प्रकाशित एक पैम्फलेट (पर्चा) ‘कुरआन की चौबीस आयतें, जो अन्य धर्मावलम्बियों से झगड़ा करने का आदेश देती हैं’ किसी व्यक्ति ने मुझे दिया।...
READ MORE

आतंकवाद और इस्लाम

आतंकवाद और इस्लाम
आजकल संचार माध्यमों के द्वारा ‘आतंकवाद’ शब्द का बहुत प्रयोग हो रहा हैं और कुछ राजनीतिक तत्व यह सिद्ध करने की चेष्टा भी कर रहे है कि इसका सम्बन्ध इस्लाम से हैं। हालांकि सामान्यत: न तो आतंकवाद का अर्थ लोगो को ठीक-ठीक मालूम हैं और न यह आसानी से सिद्ध किया जा सकता हैं कि इसका कोर्इ सम्बन्ध इस्लाम से भी हो सकता हैं। वस्तुत: उर्दू में शब्द ‘‘दहशत पसन्दी’’ अंग्रेजी शब्द Terrorism का अनुवाद हैं। ‘‘टेरर’’ का अर्थ हैं बहुत अधिक भय, खतरा और आतंक। इस अर्थ की अभिव्यक्ति के लिए फारसी शब्द ‘‘दहसत’’ (आतंक) का प्रयोग...
READ MORE

मांसाहारी भोजन मुसलमानों को हिंसक बनाता है

केवल शाकाहारी जानवरों का मांस खाने की इजाजत़ हैं
यह सही हैं कि आदमी जो कुछ खाता है उसका प्रभाव उसके व्यवहार पर पड़ता हैं। यह भी एक कारण है जिसकी वजह से इस्लाम मांसाहारी जानवरों जैसे-शेर, बाघ, चीता आदि हिंसक प्शुओं के मांस खाने को हराम (निषेध) ठहराता हैं। ऐसे जानवरों के मांस का सेवन व्यक्ति को हिंसक और निर्दयी बना सकता हैं इस्लाम केवल शाकाहारी जानवर जैसे-भैंस, बकरी, भेड़ आदि शांतिप्रिय प्शु और सीधे-साधे जानवरों के गोश्त खाने के अनुमति देता हैं।
READ MORE

मुसलमान जानवरों को निर्दयता से धीरे-धीरे उनको देकर क्यों जबह करते हैं?

मुसलमान जानवरों को निर्दयता से धीरे-धीरे उनको देकर क्यों जबह करते हैं?
जानवरों को ज़बह करने के इस्लामी तरीके़ पर जिसे ‘ज़बीहा’ कहा जाता हैं, बहुत से लोगो ने आपत्ति की हैं। इस संबंध में हम निम्न बिन्दुओं पर विचार करते हैं जिनसे यह तथ्य सिद्ध होता है कि जबह करने का इस्लामी तरीका माननीय ही नही बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी श्रेष्ठ हैं-
READ MORE

जानवरों की हत्या एक क्रूर निर्दयतापूर्ण कार्य हैं तो फिर मुसलमान मॉस क्यों खातें है?

जानवरों की हत्या एक क्रूर निर्दयतापूर्ण कार्य हैं तो फिर मुसलमान मॉस क्यों खातें है?
शाकाहार ने अब संसार भर में एक आन्दोलन का रूप् ले लिया हैं। बहुत से तो इसको जानवरों के अधिकार से जोड़ते हैं। निस्संदेह लोगों की एक बड़ी संख्या मांसाहारी हैं और अन्य लोग मांस खाने को जानवरों के अधिकारों का हनन मानते हैं।
इस्लाम प्रत्येक जीव एवं प्राणी के प्रति स्नेह...
READ MORE

इस्लाम को शान्ति का धर्म कैसे कहा जा सकता हैं जबकि यह तलवार से फैला हैं?

कुछ गै़र-मुस्लिम की यह आम शिकायत हैं कि संसार भर में इस्लाम के माननेवालों की संख्या लाखों में नही होती यदि इस धर्म को बलपूर्वक नहीं फैलाया गया होता। निम्न बिन्दु इस तथ्य को स्पष्ट कर देंगे कि इस्लाम की सत्यता, दर्शन और तर्क ही हैं जिसके कारण वह पूरे विश्व में तीव्र गति से फैला न कि तलवार सें।

1- इस्लाम का अर्थ शान्ति हैं इस्लाम मूल शब्द ‘सलाम’ से निकला हैं जिसका अर्थ है ‘शान्ति’। ..
READ MORE

इस्लाम औरतों को पर्दे में रखकर उनका अपमान क्यों करता हैं?

इस्लाम में औरतों की जो स्थिति हैं, उसपर सेक्यूलर मीडिया का ज़बरदस्त हमला होता हैं। वे पर्दे और इस्लामी लिबास को इस्लामी क़ानून में स्त्रियों की दास की मिसाल के रूप मंय पेश करते हैं। इससे पहले कि हम पर्दे के धार्मिक निर्देश के पीछे मौजूद कारणों पर विचार करें, इस्लाम से पूर्व समाज में स्त्रियों की स्थिति का अध्ययन करते हैं।

1- भूतकाल में स्त्रियों का अपमान किया जाता और उनका प्रयोग केवल काम-वासना के लिए किया जाता था..
READ MORE