इस्लाम जिससे मुझे दिली प्यार है

इस्लाम प्रेम और क्षमा का धर्म हैं

इस्लाम प्रेम और क्षमा का धर्म हैं
अंग्रेज़ी के पाठक में कमला दास और मलयालम के पाठकों में माधवी कुट्टी के नाम से जानी जाने वाली मशहूर लेखिका और कवयित्रों ने दिसम्बर १९९९ ई० में इस्लाम कबूल करके अपना नाम सुरैया रख लिया तो केरल के साहित्य, समाज, धर्म और संस्कृति के क्षेत्रों में जैसा तुफान आया, वैसा वहा के इतिहास में किसी एक व्यक्ति ...
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शांति और सद्व्यवहार का धर्म

शांति और सद्व्यवहार का धर्म
जब अफगानिस्तान पर कब्जा करने के लिए अमेरिका तालिबान के खिलाफ एकतरफा तौर पर शस्त्र हिंसक और अमानवीय कार्यवाही लिप्त था, उसी दौरान तालिबान ने ब्रिटिश पत्रकार यओन्नी रिडले को गिरफ्तार कर लिया था। वे तालिबान के सैनिकों के बर्ताव एवं आचार-विचार से बहुत प्रभावित हुई और तालिबान द्वारा उन्हें रिहा करने के बाद...
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अब्दुल्लाह आडीयार

अब्दुल्लाह आडीयार
चमत्कारों के बिना: चमत्कारों के बिना सबसे बड़ा चमत्कार दिखाने वाले नबी! धार्मिक गुरूओं पर आम लोग आसानी सें विश्वास नही करते। बहुत सारे गुरू आश्चर्यजनक और अस्वाभाविक चीजों का प्रदर्शन करते हैं और उनके चमत्कारों को देखकर आम इन्सानों की चमत्कार प्रिय अभिरूचि उन पर विश्वास करने लगती हैं।

र्इश्वर पर र्इमान भी बहुत से धर्मो मे इसी चमत्कार प्रियता पर निर्भर करता हैं- हकीकत यह हैं कि जब तक इंसान इस बात को न माने कि नेक मनुष्य को शाश्वत जीवन और बुरे मनुष्यों को शाश्वत असफलता मिलकर रहेगी तब तक...
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डॉक्टर कमला सुरैया

‘‘इस्लाम जो मुहब्बत, अमन और शान्ति का दीन है, इस्लाम जो सम्पूर्ण जीवन-व्यवस्था है, और मैंने यह फै़सला भावुकता या सामयिक आधारों पर नहीं किया है, इसके लिए मैंने एक अवधि तक बड़ी गंभीरता और ध्यानपूर्वक गहन अध्ययन किया है और मैं अंत में इस नतीजे पर पहुंची हूं कि अन्य असंख्य ख़ूबियों के अतिरिक्त इस्लाम औरत को सुरक्षा का एहसास प्रदान करता है और मैं इसकी बड़ी ही ज़रूरत महसूस करती थी...इसका एक अत्यंत उज्ज्वल पक्ष यह भी है कि अब मुझे अनगिनत ख़ुदाओं के बजाय एक और केवल एक ख़ुदा की उपासना करनी होगी।
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मुहम्मद बिलाल

मेरा संबंध ज़िला चम्पारन (बिहार) से है। मैंने 14, मार्च 2006 को इस्लाम क़बूल किया। मैं डच बैंक के सी॰सी॰ विभाग का हेड था। एक दिन एक व्यक्ति......ने मुझे फ़ोन किया, उसे मेरा नम्बर मेरे असिस्टेंट ने दिया था। आवाज़ बड़ी नर्म, मुलायम और आकर्षक थी। औपचारिक परिचय के बाद मुलाक़ात का वादा हो गया। भेंट हुई और मिलने का सिलसिला चल पड़ा। वह साहब कभी-कभी इस्लाम की बातें मुझे बताया करते थे, फिर मेरा उनके घर आना-जाना भी शुरू हो गया। उनके घर का वातावरण मुझे बहुत पसन्द आया। वु$छ दिनों बाद ऐसी स्थिति आ गई कि मैंने उनसे कहा कि मैं...
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