इस्लाम का अध्यन क्यों करे

नराशंस और अन्तिम ऋषि

‘ऋषि’ को बोद्ध धर्म की भाषा में ‘बुद्ध’ कहा जाता हैं। अन्तिम बुद्ध के विषय में भविष्यवाणी का स्वरूप प्रस्तुत हैं, जिसे गौतम बुद्ध ने अपने मृत्यु काल के समय अपने प्रिय शिष्य नन्दा से बताया था। ‘नन्दा! इस संसार में मैं न तो प्रथम बुद्ध हूं और न तो अन्तिम बुद्ध हूं। इस जगत में सत्य तथा परोपकार की शिक्षा देने के लिए अपने समय पर एक और ‘बुद्ध’ आएगा। वह पवित्र अन्त: करण वाला होगा। उसका हृदय शुद्ध होगा। ज्ञान और बृद्धि से सम्पत्र तथा समस्त लोगों का नायक होगा। जिस प्रकार मैंने जगत को अनश्वर सत्य की शिक्षा...
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वेदो ने भी हज़रत मुहम्मद के बारे में भविष्यवाणी कि हैं

वेदो ने भी हज़रत मुहम्मद के बारे में भविष्यवाणी कि हैं
मुहम्मद सल्ल0 अरब में छटी शताब्दी र्इ0 में पैदा हुए, मगर इससे बहुत पहले उनके आगमन की भविष्यवाणी वेदों में की गर्इ हैं। एक सज्जन से यह बात सुनकर मैने इसकी खोज की, फिर वेदो मंं प्यारे नबी सल्ल0 के आगमन की भविष्यवाणी को देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गया । पुराण में भी आप सल्ल0 की चर्चा हुर्इ है। महाऋषि व्यास के अठारह पुराणों में से एक पुराण ‘भविष्य पुराण’ हैं। उसका एक श्लोक यह हैं:
‘‘एक दूसरे देश में एक आचार्य अपने मित्रो के साथ आयेंगे। उनका नाम महामद होगा। वे रेगिस्तान क्षेत्र में आयेंगे। (भविष्य...
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रसूल इन्सान ही होते हैं

रसूल इन्सान ही होते हैं
इन्सानो के अन्दर सच्चार्इ, शिष्टाचार और लज्जा आदि गुण पैदा करने और उनकी शिक्षा देने के लिए प्यारे नबी सल्ल0 को भेजा गया उन्होने बड़ी ही सादगी से ये महान शिक्षाये, ज्ञान और विवके से भरपूर शिक्षाये इन्सानों को दी।
फलॉ र्इश्वर के अवतार हैं, फलॉ र्इश्वर का अंश हैं, फलॉ र्इश्वर के पुत्र हैं साधारण: इन दावो के साथ बहुत से धर्मो का आविर्भाव हुआ और उनको दुनिया ने माना भी और उनकी पैरवी करने की कोशिश की। लेकिन इस्लाम धर्म में हम देखते हैं कि मुहम्मद सल्ल0 को न खुदा कहा जाता हैं न खुदा का बेटा कहा जाता हैं न...
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जीवन, मृत्यु के पश्चात्

जीवन, मृत्यु के पश्चात्
मरने के बाद कोर्इ दूसरी जिन्दगी हैं या नहीं? और हैं तो कैसी है।? यह सवाल हकीकत में हमारे इल्म की पहुच से दूर हैं। इसलिए कि हमारी पास वे ऑखें नहीं जिनसे हम मौत की सीमा के उस पार झॉक कर देख सकें कि वहॉ क्या हैं और क्या नही हैं। हमारे पास वे कान, नही, जिन से हम उधर की कोर्इ आवाज सुन सकें। हम कोर्इ ऐसी मशीन भी नही रखते जिसके जरिए ये यकीन के साथ मालूम किया जा सके कि उधर कुछ हैं या नही। इसलिए जहॉ तक साइंस का ताल्लुक हैं..
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इस्लाम - रीतियों का धर्म नही है

इस्लाम - रीतियों का धर्म नही है
इस्लाम -परिचय के सम्बन्ध मे एक बात स्पष्ट रूप से सामने आती है कि यह सिर्फ कुछ धारणाओं, मान्यताओं, परम्परओं, पूजापाठ और रीतियों का धर्म नही है बल्कि एक समग्री धर्म है जो एक पूरी जीवन व्यवस्था को समाहित करता है...
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इस्लाम का अध्यन क्यों करे

इस्लाम का अध्यन क्यों करे
आधुनिक सभ्यता को केवल इस्लाम धर्म ही भाएगा या स्वीकार्य होगा। मुझे और अधिक आधुनिक सभ्यता को और विशेश मेरी पीढ़ी को केवल इस्लाम धर्म ही स्वीकार्य होगा।

मैं अब पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि अब आखि़रकार...
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