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विशेष प्रश्न

  • Q. 1    धर्म का आधार

    • प्रलय

      जिस प्रकार इस लोक मे प्रत्येक वस्तु का एक अंत हैं, उसी प्रकार इस वर्तमान जगत् का भी एक अंत हैं। इस संसार के इस अंत और इस महा विनाश को प्रलय कहा गया हैं। अरबी मे इसको कियामत कहा जाता है। कुरआन मे प्रलय अर्थात कियामत की चर्चा संक्षिप्त मे कर्इ स्थान पर आर्इ हैं किन्तु र्इश-दूत (पैगम्बर) हजरत मुहम्मद (स0) के वचनों के संकलन (हदीस) मे वह सविस्तार वर्णित हैं। इसी प्रकार भारतीय धर्मग्रन्थों में भी प्रलय (कियामत) की चर्चा बार-बार और सविस्तार विद्यमान है।यथा: प्रलय का समय निकट आने पर मानव-समाज की स्थिति क्या होगी? प्रलय के निकट समय मे क्या चिहन प्रकट होंगे? इत्यादि।

  • Q. 2    जीव हत्या और पशु-बलि इस्लाम की नजर में

    • जीव-हत्या और इस्लाम
      सृष्टि और स्रष्टा में संबंध सामान्य नियम हैं कि किसी समग्र (Totality) में से उसके किसी ‘अंश’ (Part) को अलग करके उसे ठीक से और पूरी तरह समझा नही जा सकता। ज्ञान-विज्ञान की सारी प्रणाली इसी सिद्धान्त की धुरी पर घूमती हैं। इस्लाम, इस्लामी शरीअत (विधान) तथा इस्लामी शिक्षाओं, नियमों, आदेशो व धार्मिक रीतियों की वास्तविकता और यथार्थता को समझने पर भी यही सिद्धान्त लागू होता हैं। पशुओं के साथ मनुष्य का व्यवहार कैसा हो और इस व्यवहार की उचित सीमा क्या हो? यह जानने के लिए सृष्टि, मनुष्य तथा पृथ्वी पर विद्यमान प्राणियों एवं इन सबके स्रष्टा मे परस्पर क्या और कैसा संबंध हैं, इसपर विचार करना आवश्यक हैं। इसके बिना उपरोक्त प्रश्न का उत्तर नही मिल सकता। अत: आवश्यक हैं कि पहले इसे समझने का प्रयास किया जाए।

  • Q. 3    गौ-वध का प्रश्न

    • प्रश्न किया जाता है कि इस्लाम सूअर के मांस पर तो प्रतिबन्ध लगाता हैं किन्तु गाय के मांस पर नही। क्या यह उचित हैं? यह प्रश्न सर्वथा बुद्धि-विरूद्ध हैं।
      सामान्य मनुष्य भी सूअर और गाय के भेद को समझता हैं। सूअर कितना घृणित पशु हैं? गाय तो हिन्दू-मुसलमान सब अपने घरो मे पालते हैं, लेकिन सूअर कितनी गन्दगी में पलता हैं कैसे नही मालूम? सूअर के मांस पर इस्लाम ने सर्वथा उचित प्रतिबन्ध लगाया है। रहा गौ मांस का प्रश्न तो गौ मांस को अवश्यक इस्लाम ने विहित ठहराया हैं किन्तु अनिवार्य नही। इस्लाम के सभी नियम बुद्धि, ज्ञान और तर्क पर आधारित हैं केवल धार्मिक भावना पर नही। वह एक शुद्ध एकेश्वरवादी धर्म है। वह गाय को पूज्य नही मानता।

  • Q. 4    इस्लामी युद्ध-नियम व संधि की क्या हैसियत है?

    • इस्लामी युद्ध-नियम व संधि की क्या हैसियत है?

      इस्लाम ने इसके विपरीत जंग के जो आदाब बताये हैं, उनकी सही हैसियत कानून की हैं, क्योकि वे मुसलमानों के लिए अल्लाह और रसूल के दिये हुए आदेश हैं, जिन की पाबन्द हम हर हाल में करेंगे, चाहे हमारा दुश्मन कुछ भी करता रहे। अब यह देखना हर इल्म रखने वाले का काम है कि जो जंगी-नियम तेरह सौ साल पहले तय किये गये थे, पश्चिम के लोगो ने उस की नक्ल की है या नही, और नकल करके भी वह जंग की सभ्य मर्यादाओं के उस दर्जे तक पहुंच सका हैं या नही, जिस पर इस्लाम ने हमे पहुचाया था।
      पश्चिम वाले अक्सर यह दावा किया करते है कि अल्लाह के रसूल (सल्ल0) ने सब कुछ यहूदियों और र्इसार्इयों से ले लिया हैं। इस लिए बाइबिल को भी पढ़ डालिए, ताकि आपको मालूूम हो जाये कि सभ्यता के इन दावेदारों की मुकद्दस किताब जंग के किन तरीको की हिदायत देती हैं।

  • Q. 5    क्या पैदा करने वाले का वजूद है ?

    • भाइयों! यदि कोर्इ व्यक्ति आपसे कहे कि बाजार में एक दुकान ऐसी हैं, जिसका कोर्इ दुकानदार नही हैं, न कोर्इ उसमें माल लानेवाला हैं न बेचनेवाला और न कोर्इ उसकी रखवाली करता है। दुकान आप-से-आप चल रही है।, आप-से-आप उसमें माल आ जाता हैं और आप-से-आप खरीदारों के हाथ बिक जाता है, तो क्या आप उस व्यक्ति की बात मान लेंगे? क्या आप स्वीकार कर लेंगे कि किसी दुकान में माल लानेवाले के बिना आप-से-आप माल आ भी सकता हैं? माल बेचनेवाले के बिना आप-से-आप बिक भी सकता हैं? हिफाजत करनेवाले के बिना आप-से-आप चोरी और लूट से बचा भी रह सकता हैं? अपने दिल से पूछिए, ऐसी बात आप कभी मान सकते है? जिसकी अक्ल और सूझबूझ ठिकाने हो क्या उसके दिमाग में कभी यह बात आ सकती हैं कि कोर्इ दुकान दुनिया में ऐसी भी होगी?

  • Q. 6    क्या मुसलमानों ने मन्दिरों को ढाया?

    • क्या मुसलमानों ने मन्दिरों को ढाया?

      इसी तरह का एक निराधार आरोप यह हैं कि मुसलमानों ने भारतीय मंदिरो को ढाया हैं।

      ऐसे आरोप लगाते समय हम भूल जाते हैं कि इस तरह की हरकते स्वयं भारत में दूसरे लोगो ने भी की हैं। हमारे यहॉ समनर पंथ वाले मंदिरो को ढाया गया। हम यह भी भूल गये कि नाटा टीनम की मूर्तियो को लूटा गया और वहॉ जो सोना था उसे तिरूमगर्इ उठा ले गये।

      हम यह तो कहते हैं कि मुसलमानों ने मन्दिर ढाये, लेकिन हम इसे भूल जाते है कि उन्होने हिन्दू मन्दिरों को जमीनों वक्फ की। मुसलमानों ने अगर कुछ मन्दिरों को ढाया हैं तो उसके कारण कुछ और रहे होंगे। इस्लाम की यह शिक्षा नही हैं कि दूसरों के उपासना स्थलों को तबाह या बर्बाद किया जाये।

      एक सज्जन ने जब यह पूछा कि भारत के इतिहास से यह बात मालूम होती हैं कि मुसलमानों ने मन्दिरों को ढाया और मूर्तियो को तोड़ा हैं। इसके बारे में आप क्या कहते हैं? इस पर अडियार जी ने कहा कि-
      हकीकत यह हैं कि भारत का जो इतिहास लोगो के हाथों में हैं, वह कोर्इ सच्चा और तहकीक की रोशनी में तैयार किया हुआ इतिहास नही हैं। मुसलमानों और अन्य धर्मो के लोगो के बीच दुश्मनी पैदा करने के उददेश्य से पश्चिम के उपद्रवियों ने यह इतिहास लिखा हैं, अगर यह साबित भी हो जाए कि मुसलमानों ने मन्दिरों को ढाया हैं और मूर्तियों को तोड़ा हैं तो मेरा जवाब यह होगा कि इस्लाम में दूसरे धर्मो के...

  • Q. 7    क्या इस्लाम तलवार से फैला?

    • क्या इस्लाम तलवार से फैला?

      यह कहना कि इस्लाम तलवार के जोर से फैलाया गया हैं, केवल एक गलत दावा हैं जो पूर्णरूप से गलतफहमी पर आधारित हैं। आइये इस पहलू से भी हकीकत का जायजा ले और सही नतीजे तक पहुंचने की कोशिश करें।

      र्इसाइयत और इस्लाम अपने आरम्भ काल में गुप्त प्रचार के द्वारा फैलाए गए।

      हजरत मसीह के बाद र्इसाइयत का प्रचार उनके अनुयायियों ने किया।

      लेकिन इस्लाम का प्रचार कुछ ही दिनों एक गुप्त रूप में हुआ, फिर खुल्लम-खुल्मा उसके प्रचार का हुक्म आ गया।

  • Q. 8    मुसलमान रूढ़िवादी और आतंकवादी होते हैं

    • धर्म या विश्व राजनीति से संबंधित चर्चाओं में यह प्रश्न प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप् से मुसलमानों पर उछाला जाता हैं। मीडिया के किसी भी साधनों में मुसलमानों को बख़्शा नहीं जाता और इस्लाम तथा मुसलमानों के संबंध में बड़े पैमाने पर ग़लतफ़हमियॉ फैलार्इ जाती हैं, उन्हे कट्टरवादी के रूप् में दर्शाया जाता है। वास्तव मे ऐसी ग़लत जानकारियॉ और झूठे प्रचार अकसर मुसलमानों के विरूद्ध हिंसा और पक्षपात का कारण बनते हैं। इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण अमेरिकी मीडिया द्वारा मुसलमानों के विरूद्ध चलाए जाने वाली मुहिम हैं जो ओकलाहोमा बस धमाके के बाद चलार्इ गर्इ। प्रेस ने तुरन्त यह एलान कर दिया कि इस धमाके के पीछे ‘मध्य पूर्वी “ाडयंत्र‘ काम कर रहा हैं। बाद में अमेरिकी सेना का एक जवान इस कांड में दोषी पाया गया ।

      अब हम मुसलमानों के रूढ़िवादी और आतंकवादी होने के आरोपों का जायजा लेते हैं।

  • Q. 9    इस्लाम औरतों को पर्दे में रखकर उनका अपमान क्यों करता हैं?

    • इस्लाम में औरतों की जो स्थिति हैं, उसपर सेक्यूलर मीडिया का ज़बरदस्त हमला होता हैं। वे पर्दे और इस्लामी लिबास को इस्लामी क़ानून में स्त्रियों की दास की मिसाल के रूप मंय पेश करते हैं। इससे पहले कि हम पर्दे के धार्मिक निर्देश के पीछे मौजूद कारणों पर विचार करें, इस्लाम से पूर्व समाज में स्त्रियों की स्थिति का अध्ययन करते हैं।

      1- भूतकाल में स्त्रियों का अपमान किया जाता और उनका प्रयोग केवल काम-वासना के लिए किया जाता था

      इतिहास से लिए निम्न उदाहरण इस तथ्य की पूर्ण रूप से व्याख्या करते हैं कि आदिकाल की सभ्यता में औरतों का स्थान इस सीमा तक गिरा हुआ था कि उनकी प्राथमिक मानव सम्मान तक नही दिया जाता था।