न्याय की शिक्षा

‘‘ ऐ र्इमानवालों (मुसलमानों)! र्इश्वर के लिए न्याय की गवाही देने हेतु खड़े हो जाया करो और लोगों की दुश्मनी तुमकों इस बात पर तत्पर न करे कि तुम न्याय न करो। तुमको चाहिए कि (हर अवस्था में) न्याय करो, यही बात धर्मपरायणता से अधिक निकट है तथा र्इश्वर से डरते रहो। निस्संदेह! र्इश्वर उन तमाम कामों का ज्ञान रखता हैं जो तुम करते हो।’’ (कुरआन, 5:8)

‘‘र्इश्वर तुम कों आदेश देता हैं न्याय का, सदव्यवहार का और निकट संबंधियों को देने का और मना करता है निर्लज्जता से, दुष्कर्मो से तथा अतिक्रमण से। वह तुम्हे इन बातों का उपदेश करता हैं, ताकि तुम इनको याद रखो।’’ (कुरआन, 16:90)

2-    प्रतिज्ञा पालन की शिक्षा

‘‘ऐ र्इमानवालों! अपने वचनों को पूरा किया करो।’’ (कुरआन, 5:1)

‘‘र्इश्वर के नाम के साथ बांधी हुर्इ प्रतिज्ञा को पूर्ण करो और सौगंधों को दृढ़ करने के बाद उनको भंग न कर डालों।’’ (कुरआन, 16 : 91)

3-    मुसलमानों! यदि तुम (कष्ट देनेवालों से) बदला लेना चाहो तो उसी के बराबर बदला लो जितना उनसे तुमकों कष्ट पहुंचा हो और यदि तुम धैर्य से काम लो तो यह धैर्य करनेवालों के लिए अच्छा हैं। और ऐ पैगॅम्बर! तुम तो धैर्य ही से काम लो, और तुम्हारा धैर्य करना तो र्इश्वर ही के प्रति है और उन लोगो के विषय मे चिंता न करों (जो तुमसे द्वेष रखते हैं) और वे जो दुर्भावना रखते हैं उससे दुखी न हो। निस्संदेह! र्इश्वर उन्ही के साथ होता हैं जो संयमी हैं तथा जो सदाचारी हैं।’’ (कुरआन, 16 :126-128) भलार्इ और बुरार्इ बराबर नही। (अत:) तुमकों चाहिए कि तुम (अपशब्द का) उत्तर ऐसे ढंग से दो जो सबसे उत्तम हो, तो (ऐसा करके तुम अनुभव करोगे कि) जिस व्यक्ति में और तुममें दुश्मनी थी वह मानों तुम्हारा घनिष्ट मित्र हैं, और (विशाल हृदयता का) यह गुण उन्ही लोगो को प्राप्त होता हैं जो सहिष्णुता से काम लेते हैं तथा उनको जो बड़े भाग्यशाली होते हैं’’

Author Name: कुरआन मानवता का राजमार्ग:अबू-मुहम्मद इमामुद्दीन रामनगरी व मुहम्मद जैनुल आबिदीन मंसूरी