इस्लाम कैसा इन्सान बनाता?

इन्सान को अच्छा इन्सान बनाने की इस्लाम से बेहतर दूसरी कोर्इ व्यवस्था नही। इस्लाम मनुष्य को उसका सही स्थान बताता हैं, उसकी महानता का रहस्य उस पर खोलता हैं उसका दायित्व उसे याद दिलाता हैं और उसकी चेतना को जगाता हैं उसे याद दिलाता हैं कि उसे एक उद्देश्य के साथ पैदा किया गया हैं, निरर्थक नही। इस संसार का जीवन मौजमस्ती के लिये नही हैं। हमे अपने हर काम का हिसाब अपने मालिक को देना हैं। यहां हर काम खूब सोच-समझ कर करना हैं कि यहां हमारे कामो से समाज सुगन्धित भी हो सकता हैं
और हमारे दुष्कर्मो से एक अभिशाप भी बन सकता हैं। इस्लाम जो इन्सान बनाता हैं वह दूसरों का आदर करने वाला, सच्चार्इ पर जमने वाला, अपना वादा निभाने वाला, कमजोरो का सहारा बनने वाला और भलाइयों मे पहल करने वाला होता हैं। वह स्वंय भी बुराइयों से बचता हैं और दूसरों कोभी इस से रोकता हैं। इस्लामी आदर्शो मे ढला हुआ इन्सान भलाइयों का पुतला और बुरार्इयों का दुश्मन होता हैं।

इस्लाम और उसका अर्थ
                हजरत मुहम्मद (स0) के द्वारा इस्लाम हम तक पहुंचा हैं।
इस्लाम अरबी भाषा का शब्द है, जिसका एक अर्थ है ‘आज्ञापालन’ और दूसरा ‘शांति’। मुस्लिम आज्ञाकारी के कहते हैं-अर्थात अल्लाह का आज्ञाकारी, उसका आदेश मानने वाला, उसके आगे सिर झुका देने वाला। अल्लाह ने जितने पैगम्बर भेजे उन सब ने ऐकेश्वरवाद का पाठ पढ़ाया । किसी ने अपनी उपासना का हुक्म नही दिया, किसी ने खुद को र्इश्वर या उसका रूप नही कहा। यह बात बड़ी विचित्र रही हैं कि अधिकतर लोगो ने अपने पैगम्बरों को झुठलाया, उनकी बात न मानी, बल्कि उन्हे सताया, यातनाएॅ दी और जब उनकी मुत्यु हो गर्इ तो उन्हे पूज्य घोषित कर दिया, उनकी मूर्तियां बनाने लगे  और उसी से सहायता मांगने लगे। वास्तव में सारे पैगम्बरों का धर्म एक ही था ‘इस्लाम’। सब का परम उद्देश्य र्इश्वर का आज्ञाकारी बनाना था यह भी उल्लेखनीय हैं कि इस पूरे संसार का धर्म भी इस्लाम ही हैं। जमीन, सूर्य, पहाड़, हवा, पेड़-पौधे, बादल, चॉद, तारे, सब उस नियम का पालन कर रहे हैं, जिस का बनाने वाले ने उन्हे पाबन्द कर दिया हैं।

Author Name: इस्लाम और मानव समाज :सैयद मुहम्मद इकबाल