धरोहर-रक्षक: ग्रेट टीचर हरबर्ट वॉयल लिखते हैं-

‘‘ हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) को आसपास के रहने वाले लोग अमीन (धरोहर-रक्षक) कहकर पुकारते थे। ग़रीब लोग, जो कष्ट में पड़े होते आपके पास परामर्श करने आते थे, क्योकि उन्हे आपकी सच्चार्इ पर विश्वास था। हजरत मुहम्मद (सल्ल0) अधिकतर एक निर्जन स्थान में गुफा के भीतर र्इश-उपासना में लीन रहते। एक रात आसमान से एक प्रकाश प्रकट हुआ और एक तेजस्वी आकृति पर आपकी आपकी दृष्टि पड़ी जिसने कहा-

        उठ! त्ू खुदा का पैगम्बर हैं। अपने पालनकर्ता का नाम लेकर पढ़। इसके बाद उस फरिस्ते (दैवी आत्मा) ने कुछ उपदेश दिए। यह वह अद्भुत और विचित्र घटना थी जिसने हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) के जीवन को सर्वथा बदल दिया। इससे पहले वे केवल एक ‘ अमीन’ थे। मगर अब रसूल (सन्देष्टा) हो गए। उन्होने जो सर्वप्रथम उपदेशों को दिया उसमें र्इश्वर के एकत्व का वर्णन था और मानव-हत्या, मद्यपान और हर कुकर्म की निन्दा की गर्इ थी। बहुत से लोगो ने इस्लाम धर्म स्वीकार किया। वास्तव में यह अनुमान करना कठिन हैं कि हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) लोगो के दिलों को जीत लेने की कितनी महान् शक्ति रखते थे।’’

Author Name: इमामुद्दीन रामनगरी: मधुर सन्देश संगम