नारी - उद्धारक: श्रीमति एनीबेसेन्ट अपने लेक्चर में कहती हैं-

‘‘आप जरा हमारे पैग़म्बर का ख्याल कीजिए और उस स्थिति की कल्पना कीजिए जब केवल उनकी पत्नी ही उन पर र्इमान लार्इ हैं। उसके बाद अत्यन्त निकटतम सम्बन्धी उन पर र्इमान लाते हैं। इस बात से भी मुहम्मद (सल्ल0) के विषय में कुछ-न-कुछ पता चलाता है। एक ऐसे समूह में से अनुयायी प्राप्त कर लेना सहज हैं, जो आपकों नहीं जनता, जो आपकी केवल प्लेटफार्म ही पर देखता हैं। जो आपका केवल लिखा लिखाया भाषण ही सुनता हैं या आपको कुछ सलावों को जवाब देने की हालत में देखता हैं। लेकिन अपनी पत्नी, अपनी बेटी और अपने दामाद और दूसरे निकटवर्ती सम्बन्धियों की नजरों में नबी बनना, वास्तव में नबी बनना हैं और यह एक ऐसी विजय हैं जो हजरत र्इसा (अलैहि0) को भी प्राप्त नहीं हुर्इ।