इस्लाम जिससे मुझे प्यार हैं।

जनाब अब्दुल्ला अडियार मरहूम तामिल भाषा के प्रसिद्व कवि, पत्रकार, उपन्यासकार और पटकथा लेखक थें। उनका जन्म 16 मई 1935 को त्रिरूप्पर (तमिलनाडु) में हुआ। प्रारम्भिक षिक्षा कोयम्बटूर में हुई। वे नास्तिक थें, लेकिन विभिन्न धर्मो की पुस्तकें पढ़ते रहते थें। किसी पत्रकार और साहित्यकार को विभिन्न धर्मो के बारे में जानकारी रखनी पढ़ती हैं। जनाब अब्दुलाह अडियार अध्ययन के दौरान इस परिणाम पर पहुंचे कि इस्लाम ही सच्चा धर्म हैं और मनुश्य के कल्याण की शिक्षा देता हैं। आख़िरत 6 जून 1987 ई0 को वे मद्रास स्थित मामूर मस्जिद गये और इस्लाम क़बूल कर लिया।


इस्लाम क़बूल करने के पहले वे डी0एम0के0 के प्रसिद्व समाचार-‘पत्र’ ’मुरासोली‘ के 17 वर्षों तक संपादक रहें। डी0एम0के0 नेता सी0एन0 अन्नादुराई जो बाद में तामिलनाडू के मुख्यमंत्री भी रहें, ने जवाब अडियार को संपादक पद पर नियुक्त किया था। जनाब अडियार ने 120 उपन्यास 13 नाटक और इस्लाम पर 12 पुस्तकों की रचनाएं की। इमरजेसी के दौरान उन्हें गिरफ़्तार किया गया और क़ाफी प्रताड़ित किया गया। जेल में उन्होने जनाब यूसुफ़ अली का क़ुरआन मजीद का अंग्रेजी अनुवाद पढ़ा और उससे काफी प्रभावित हुए। इस्लाम से प्रभावित होकर उन्होने ’नान कडिलिक्कम इस्लाम (इस्लाम जिससे मुझे प्यार हैं।) पुस्तिका लिखी, जिसका बाद में हिन्दी, अंग्रेजी ,मराठी, सिन्धी, मलयालम और उर्दू में अनुवाद हुआ ।