इस्लाम प्रेम और क्षमा का धर्म हैं

इस्लाम प्रेम और क्षमा का धर्म हैं

अंग्रेज़ी के पाठक में कमला दास और मलयालम के पाठकों में माधवी कुट्टी के नाम से जानी जाने वाली मशहूर लेखिका और कवयित्रों ने दिसम्बर १९९९ ई० में इस्लाम कबूल करके अपना नाम सुरैया रख लिया तो केरल के साहित्य, समाज, धर्म और संस्कृति के क्षेत्रों में जैसा तुफान आया, वैसा वहा के इतिहास में किसी एक व्यक्ति के धर्म बदलने से नहीं आया था। उनके दोस्तों और रिशतेदारों ने जहा यह कहकर उनके इस कदम का स्वागत किया था कि कमला दास को अपनी पसन्द का धर्म चुनने का अधिकार हैं और इस पर सवाल खड़ा करने का हक किसी को नहीं हैं। वहीं कुछ लोगों ने मोहतरमा सुरैया को मौत के घाट उतार देने की धमकिया भी दीं थी। अपने लेखन में एक कमला दास ने कृष्ण की राधा होने का दावा किया हैं। वे कहती हैं। कि अगर आप गुरूवार जाए तो वहा आपको कृष्णा नहीं मिलेंगे। उनका नाम पैगम्बर मुहम्मद सल्ल रख लिया हैं।

कृष्ण के बारे में उनकी इस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिकिया व्यक्त करते हुए वहा के, संघ परिवार के, एक नेता ने कहा था, उनके बयान से गुरूवारपप्पन के करोड़ों भक्तों की भावनाओं को चोट पहुचेगी। घर से बाहर निकलते हुए उन्हें अपने सहधमियों का कद नहीं घटना चाहिए था, जहा वे साठ साल तक पली-बढ़ी। केरल के सामाजिक जीवन के पाखंडों को बेनकाब करने वाली इस मशहूर लेखिका और कवयित्री के इस्लाम कबूल कर लेने से केरल के मुस्लिम समुदाय में बड़ा उत्साह था। ’अमियोप्पा‘ को बधाइ देने के लिए इस समुदाय के औरत-मर्दों का तांता लग गया था। दैनिक मातृभूमि के पव सम्पादक वी० एस० नायर और मलयालम की जानी-मानी कवयित्री बालमणि अम्मा की बेटि माधवी कुट्टी को उनके करीबी अमियोप्पा के नाम से ही फुकारते थे। उनका जन्म एक साहित्यिक और बौद्वकि वातावरण में ३१ मार्च १९३४ ई० में केरल के मालाबार जिले के पुन्नायुकुलम गाव में हुआ था।