मुसलमानों पर पृथकतावाद का आरोप

मुसलमानों पर आरोप लगाया जाता हैं कि वे बड़े पृथकतावादी हैं। औष्ट्रिक, नीग्रो, मंगोल आदि जितनी जातियॉं भारत आर्इ, हिन्दूओं में घुल-मिलकर एक हो गर्इ परन्तु मुसलमान अब तक अपना पृथक अस्तित्व बनाए हुए हैं।

मुसलमानों पर यह आरोप लगानेवाले इसके कारणों पर विचार नही करते। मुसलमानों के पहले जो जातियॉ भारत आर्इ उनके पास न हिन्दुओं के धर्म जैसा धर्म था, न विद्या जैसी विद्या थी, अत: वे हिन्दुओं में घुलमिल गर्इ। किन्तु इसका परिणाम क्या हुआ? हिन्दु धर्म विकृत हो गया। वर्तमान हिन्दु धर्म प्राचीनवैदिक धर्म नही हैं। यह अनेक धर्मो का सम्मिश्रण हैं।
दूसरी जातियों के विपरीत मुसलमान एक महान् धर्म, एक महान् धर्म ग्रन्थ कुरआन, एक महान् धर्म नेता एवं अन्तिम र्इशदूत मुहम्मद साहब का आदर्श जीवन चरित्र और विशाल इतिहास लेकर आए। ये विशुद्ध एकेश्वरवादी थें। उनका आधारभूत कलिमा था- ‘ला इलाह इल-लल-लाह’ र्इश्वर के सिवा कोर्इ उपास्य नही, उनको गौरव था कि उनका सिर र्इश्वर के सिवा किसी के आगे नही झुक सकता। यहॉं असंख्य देवालय थे जिनमें काल्पनिक देवी-देवताओं की पूजा, उपासना और आराधना प्रचलित थी। पशु-पक्षी तक पूज्य थे। यहॉ अवतारवाद मान्य था, वहॉ मुहम्मद साहब भी र्इश्वर के उपासक, भक्त एवं अन्तिम दूत मात्र थे; यहॉ ब्राहम्मणवाद था, शुद्ध-अशुद्ध था,। मुसलमानों में यह सब भेदभाव न था, सब समान थे।

मुसलमान अपनी सभ्यता, भाषा आदि को सुरक्षित रखना चाहते है तो उनपर अराष्ट्रीय होने की लांछना लगार्इ जाती हैं। हिन्दुओ का अपना क्या हाल हैं? हिन्दू तो सब हैं फिर उनकी भाषा क्यों भिन्न-भिन्न हैं और क्यों भाषाओं के आधार पर राज्य बने हैं? दक्षिण के हिन्दू तो हिन्दी का विरोध भी कर रहे है। सिख अपना राज्य ही अलग चाहते है। कश्मीर में मुसलमानों का बहुमत हैं जम्मू के हिन्दू उसे सहन नही कर रहे हैं। चाहते हैं जम्मू को हिमाचल प्रदेश में सम्मिलित कर दिया जाए। सभी प्रदेश केन्द्र से अधिक अधिकार अर्थात् अधिक स्वतन्त्रता की मॉंग कर रहे हैं, और पृथकता और अराष्ट्रीयता के दोषी केवल मुसलमान ठहराए जा रहे हैं। यह कैसा न्याय हैं? कुछ मुख्य बातों को छोड़कर मुसलमान किस बात में राष्ट्र से पृथक है? पुलिस पी0ए0सी0 तथा दूसरे विभागों में उनके अनुपात के अनुसार स्थान नही दिया जाता। तीस वर्ष से उनके साथ अन्याय हो रहा है।

Author Name: इस्लाम एक स्वयं सिद्ध र्इश्वरीय जीवन व्यवस्था:राजेन्द्र नारायण लाल