मानव-जीवन का सर्वोत्तम आदर्श: राजा राधा प्रसाद सिंह, (बी0ए0, एल0एल0बी0)

मानव-जीवन का सर्वोत्तम आदर्श

राजा राधा प्रसाद सिंह, (बी0ए0, एल0एल0बी0) हजरत मुहम्मद साहब के जन्म दिवस की एक सभा के भाषण में कहते हैं-

    ‘‘ विश्व-भूगोल और इतिहासके पृष्ठ, संसार के किसी भाग या कोने का, ऐसा उदाहरण नही पेश कर सकें जिसमें प्रकृति ने हर समाज, हर समूह, हर वंश और हर जाति के चरित्र और स्वभाव के सुधार और बनाव के लिए नबी, अवतार पथप्रदर्शक, हादी, पैगम्बर न भेजे हों।
‘‘ वलिकुल्लि कौमिन हाद’ पवित्र कुरआन की यह आयत इस बात की साक्षी हैं कि प्रकृति ने हर कोने और हर भाग पर चाहे पूरब में हो या दक्षिण में, कोर्इ-न-कोर्इ समाज-सुधारक, देश और समाज की उन्नति और नैतिक विकास के लिए अवश्यक उत्पन्न किया।’’
यदि हम किसी सुधारक, नबी या अवतार के जीवन-चरित्र या जीवन-घटनाओं की पूर्ण खोंज करें तो हमारी दृष्टि के सामने उनके जीवन की समस्त घटनाएॅ और वातावरण नही आ सकते। लेकिन यह विशेषता सदगुणों के स्रोत पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ही को प्राप्त हैं कि आपकी जीवनी के से ही आपके जीवन के संक्षिप्त अध्ययन से ही आपके जीवन का साफ चित्र हमारी ऑखों के सामनें खिंच जाता हैं। अगर इस पवित्र आत्मा के जीवन की यत्र-तत्र घटनाओं पर भी प्रकाश डाला जाए तो इसके लिए भी एक बड़े ग्रन्थ जरूरत होगी। यह संक्षिप्त निबन्ध तो इस बात के लिए किसी तरह भी पर्याप्त नही हो सकता कि इस साकार ज्योति तथा सच्चार्इ और स्वच्छता की मूर्ति के आदर्शपूर्ण आचार-व्यवहार- जिसके सम्बन्ध में खुदा कुरआन में स्वंय कहता हैंं तुम्हारे लिए हजरत मुहम्मद (सल्ल0) का जीवन सर्वोत्तम आदर्श हैं-पेश कर दिए जाएॅ। इस समय नमूने के तौर पर कुछ प्रमुख और स्पष्ट घटनाएॅ जिनसे आपकी सम्मानित (श्रोतागण की) रूह को ताजगी पहूॅचने की प्रबल आशा हैं, प्रस्तुत करता हूॅ।

इसके बाद सिन्हा साहब ‘पैगम्बर साहब की सच्चरित्रता की महानता ‘समता और सत्यता’ ‘धैर्य’ और दृढ़ता’ ‘दया और बंधुत्व’ शीर्षकों के अन्तर्गत आप (सल्ल0) की सच्चरित्रता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालने के बाद ‘बन्धुत्व और समता का अद्वितीय मुकुटधारी’ शीर्षक से कहते हैं-

‘‘ वास्तव में आप (सल्ल0) ही की शिक्षा एक ऐसी शिक्षा हैं, जिसने जात-पात के बन्धन को उचित नही ठहराया। आपका नियम है कि समस्त मानव-जाति चाहे गोरे हों या काले, धनवान हों या निर्धन, प्रबल हों या दुर्बल, सभ्य समाज से सम्बन्ध रखनेवाले हों या असभ्य, या कोर्इ और हो सब बराबर हैं और सब समान अधिकार रखते हैं। आपकी शिक्षा के अनुसार र्इश्वर की दृष्टि मे साधारण मनुष्य और बड़े-से-बड़ा सम्राट दोनो एक हैसियत के मालिक हैं, क्योकि उसके दरबार में व्यक्तित्व की पूछ नही होती, वहॉ तो अच्छे कर्म की जरूरत हैं, इसी पर सारी सभ्यता और बड़प्पन निर्भर हैं।’’

Author Name: इमामुद्दीन रामनगरी: मधुर सन्देश संगम